काशी की शिवपंथी अघोरी साधना, तांत्रिक परंपरा है रौद्रता प्रदर्शनी

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क,

27  फरवरी से जेकेके में

जयपुर ।‘रौद्रता – तस्वीरकला की अभिव्यक्ति’ शीर्षक से आयोजित प्रदर्शनी में तस्वीरकार जयेश वाला, (प्रेस फोटोग्राफर,मेट्रो टाइम्स,अहमदाबाद ,गुजरात) द्वारा भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के गूढ़ और रौद्र पक्ष को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यह प्रदर्शनी विशेष रूप से काशी की शिवपंथी अघोरी साधना, तांत्रिक परंपरा और जीवन-मृत्यु के शाश्वत सत्य को केंद्र में रखती है।

भारतीय संस्कृति में प्रकाश और अंधकार, सृजन और संहार, जीवन और मृत्यु—सभी को समान रूप से स्वीकार किया गया है। इसी दर्शन को आधार बनाकर प्रस्तुत इस तस्वीर श्रृंखला में गंगा तट के श्मशान घाटों की आध्यात्मिक ऊर्जा, भस्म-विभूषित साधुओं की साधना, रुद्राक्ष और तांडव भाव की अनूठी झलक दिखाई गई है। चित्रों के माध्यम से मृत्यु के बोध से उत्पन्न वैराग्य और मोक्ष की अवधारणा को सजीव रूप में अभिव्यक्त किया गया है।

तस्वीरकार जयेश वाला ने अपने लंबे अनुभव और देश के विभिन्न सांस्कृतिक स्थलों की यात्राओं से प्राप्त दृष्टि को इन कृतियों में समाहित किया है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित उनकी कला दर्शकों को भारतीय परंपरा के रहस्यमय, अद्भुत और चिंतनशील आयाम से परिचित कराती है।

यह प्रदर्शनी कला प्रेमियों एवं अध्यात्म में रुचि रखने वाले दर्शकों के लिए एक विशिष्ट अनुभव सिद्ध होगी।

स्थान: सुकृति, जवाहर कला केंद्र (JKK), जयपुर, राजस्थान ,  27 फरवरी से 1 मार्च

 

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