लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
उनियारा (सत्यप्रकाश मयंक) – जैन धर्म के पावन दशलक्षण पर्व के अवसर पर शहर में एक बालिका ने प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। बुलबुल सोगाणी ने त्याग, तप और आत्मसंयम को अपनाते हुए रत्नतय तेला कर धैर्य और दृढ़ इच्छाशक्ति का संदेश दिया।
जैन समाज के लोगों ने बताया कि रत्नतय तेला करने वाले साधक को तीन दिनों तक निराहार रहना होता है, और इस दौरान केवल दिन में एक बार पानी का सेवन कर आत्मसंयम का पालन करना पड़ता है। बुलबुल ने न केवल यह कठिन तप स्वीकार किया बल्कि पूरे समर्पण के साथ इसे निभाकर सभी के लिए प्रेरणा बन गई।
रत्नतय तेला के उद्यापन पर बुलबुल सोगाणी को उनके परिवारजन और समाजबंधुओं ने उपहार देकर सम्मानित किया। समारोह के दौरान उन्हें माला पहनाकर बैण्ड-बाजे के साथ मंदिर तक ले जाया गया, जहाँ भगवान की पूजा-अर्चना कर णमोकार मंत्र का जाप किया गया। इस मौके पर परिवारजन और समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और बुलबुल की तपस्या की सराहना की।
यह आयोजन आत्मसंयम, सेवा, त्याग और आध्यात्मिक साधना का प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा, जिसने युवाओं को भी धैर्य और आत्मबल की दिशा में प्रेरित किया।











































