राष्ट्रीय धर्म सेवक संघ ने जगाई सनातन चेतना की नई लौ

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
 राजस्थान में आध्यात्मिक पुनर्जागरण का सूत्रपात
झिलाई, टोंक — दादू दयाल गौशाला के पावन प्रांगण में वह दिव्य क्षण साकार हुआ जब गौ ऋषि प्रकाश दास जी महाराज की अध्यक्षता में राष्ट्र्रीय धर्म सेवक संघ की ऐतिहासिक प्रथम बैठक संपन्न हुई। यह केवल एक बैठक नहीं, बल्कि एक सनातन जागरण था—गौ माता की सेवा, भारत की सांस्कृतिक जड़ों और हिंदू सभ्यता के अनादि मूल्यों को समर्पित एक नए धर्मिक परिवर्तन का उद्घोष।
संस्थापक सदस्य अनुराग शर्मा और अमित शर्मा, साथ में एडवोकेट ऋतिक प्रधान, ज्ञानेंद्र कौशिक, FAIR रिपोर्ट के कंसल्टिंग एडिटर हेमराज टिकमचंद तिवारी तथा अनेक संत-महंत और विशिष्ट गण उपस्थित रहे और इस आध्यात्मिक विमर्श को दिशा प्रदान की।
कामधेनु शिक्षाक संस्थान, नागौर के सदस्यों ने पूर्ण समर्पण के साथ कार्यक्रम में सहभागिता की और एक पावन सनातनी संकल्प लिया—गौ संरक्षण, भारत की आध्यात्मिक धरोहर की रक्षा, और धर्म सेवक के रूप में सनातन धर्म के सिद्धांतों व अनुष्ठानों का पालन।
सभा का आध्यात्मिक केंद्र वह शक्तिशाली संदेश रहा जो प्रकाश दास जी महाराज द्वारा दिया गया। उन्होंने घरों की पूजाओं से निकले फूलों, खंडित मूर्तियों और पवित्र चित्रों को कूड़े में या सड़कों पर फेंक देने की बढ़ती प्रवृत्ति पर गहरी चिंता व्यक्त की। महाराज जी ने स्पष्ट कहा कि यह ईश-अपमान अब सहन नहीं होगा। उन्होंने घोषणा की कि एक सनातन सांस्कृतिक क्रांति की शुरुआत हो चुकी है—और अब धर्म सेवक हर पवित्र वस्तु के संरक्षक बनकर खड़े रहेंगे।
इसी उद्देश्य से अगले वर्ष से एक राज्यव्यापी धर्म सेवक सेवा नेटवर्क शुरू किया जाएगा। केवल एक फोन कॉल पर प्रशिक्षित धर्म सेवक खंडित मूर्तियों या पूजन सामग्री को सम्मानपूर्वक संग्रहित कर शास्त्रोक्त विधि से उसका विसर्जन करेंगे।
गौ ऋषि प्रकाश दास जी महाराज के आशीर्वाद के साथ यह ऐतिहासिक आयोजन संपन्न हुआ, जिसने उपस्थित सभी भक्तों में नई शक्ति, नया विश्वास और नई दिशा का संचार किया। झिलाई से प्रारंभ हुआ यह आंदोलन अब एक सनातन पुनर्जागरण के रूप में उभर रहा है—राजस्थान को धर्मिक उत्थान, सांस्कृतिक रक्षा और आध्यात्मिक क्रांति के एक नए युग की ओर अग्रसर करते हुए।
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