लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
एक सप्ताह में दो दर्जन मोरों की मौत, बुधवार को भी 3 मृत मिले; ग्रामीणों में भारी आक्रोश
कठूमर (अलवर) | रिपोर्टर संजीव बंसल
कठूमर उपखंड क्षेत्र में राष्ट्रीय पक्षी मोरों की रहस्यमयी मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ग्राम सूरजपुरा में बुधवार को एक नर और दो मादा सहित तीन मोर मृत अवस्था में मिले, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया। पिछले एक सप्ताह में करीब दो दर्जन मोरों की मौत हो चुकी है, जिसने वन्यजीव संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
️ ग्राउंड जीरो: जंगल में पसरा मातम
बुधवार सुबह सूरजपुरा निवासी रामेश्वर सैनी, समुद्र सैनी और प्रभाती सैनी जंगल की ओर गए, तभी उन्होंने एक मोर को पेड़ से गिरते देखा। पास जाकर देखा तो पहले से कई मोर मृत पड़े थे।
ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस और वन विभाग को सूचित किया। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्रित हो गए और राष्ट्रीय पक्षी की लगातार हो रही मौतों पर गहरी चिंता जताई।
ग्रामीणों में आक्रोश: “कई बार सूचना दी, पर अधिकारी नहीं आए”
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई दिनों से मोरों की सामूहिक मौत हो रही है।
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वन विभाग
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पशु चिकित्सा विभाग
दोनों को कई बार सूचना देने के बावजूद कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, जिससे आक्रोश और बढ़ गया है। ग्रामीणों ने कहा कि राष्ट्रीय पक्षी की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
⚠️ जहरीले कीटनाशक का संदेह
ग्रामीणों का मानना है कि किसानों द्वारा फसलों में किए जा रहे जहरीले कीटनाशकों के छिड़काव के कारण मोरों की मृत्यु हो सकती है।
हालांकि, वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
️ प्रशासनिक हस्तक्षेप: जांच के आदेश जारी
सूचना मिलने पर हेड कांस्टेबल रघुवीर सिंह पुलिस दल के साथ मौके पर पहुंचे।
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एक घायल मोर को कठूमर पशु चिकित्सालय भेजा गया।
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तीन मृत मोरों की सूचना वन विभाग को दी गई।
उपखंड अधिकारी श्याम सुंदर चेतीवाल ने कहा:
“यह अत्यंत गंभीर मामला है। वन विभाग और पशु चिकित्सा विभाग को मौके पर पहुँचकर पोस्टमार्टम कर विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।”
वन विभाग की कार्रवाई
जितेंद्र सिंह, वनपाल नाका मैथना ने बताया—
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घायल मोर का उपचार करवाकर उसे वन चौकी लक्ष्मणगढ़ पर रखा गया है, वह अब स्वस्थ है।
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एक नर और दो मादा मोरों का पोस्टमार्टम कराया गया।
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मृत मोरों का अंतिम संस्कार तहसीलदार हरदयाल और क्षेत्रीय वन अधिकारी रविंद्र सिंह भाटी की मौजूदगी में करवाया गया।











































