लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर । राजस्थान में जाति प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया आम जनता के लिए कठिन और जटिल होती जा रही है। समाजसेवी मोहम्मद हारून रंगरेज ने इस संबंध में राज्य सरकार की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदक को पहले अपनी ओबीसी श्रेणी साबित करनी होती है। इसके बाद फॉर्म पर दो गजेटेड अधिकारियों के हस्ताक्षर अनिवार्य कर दिए गए हैं। इतना ही नहीं, आय प्रमाण पत्र पर भी दो गजेटेड अधिकारियों के हस्ताक्षर जरूरी बताए जा रहे हैं।
रंगरेज ने सवाल उठाया कि आम और गरीब व्यक्ति दो-दो गजेटेड अधिकारी कहां से लाए? उनका आरोप है कि अधिकांश अधिकारी हस्ताक्षर करने से बचते हैं, जिससे लोगों को घंटों दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
उन्होंने बताया कि प्रक्रिया यहीं खत्म नहीं होती। आवेदक से पट्टा, रजिस्ट्री, पटवारी की रिपोर्ट और अंत में सभी दस्तावेजों का नोटरी सत्यापन भी अनिवार्य किया जाता है। इतनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद भी कई मामलों में फाइलों पर आपत्तियां लगा दी जाती हैं और प्रमाण पत्र जारी नहीं हो पाता।
सबसे गंभीर मुद्दा यह बताया गया कि जिन लोगों के पास पहले से जाति प्रमाण पत्र मौजूद है, यहां तक कि उनके पिता और दादा का भी प्रमाण पत्र बना हुआ है, फिर भी संशोधित या नया प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा रहा। वैध दस्तावेज होने के बावजूद फाइलों में आपत्तियां लगाई जा रही हैं, जिससे आवेदकों को बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
रंगरेज का आरोप है कि यह जटिल प्रक्रिया भ्रष्टाचार और दलालों को बढ़ावा दे रही है। मजबूरी में लोगों को बिचौलियों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की हानि होती है।
उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है कि जाति प्रमाण पत्र की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाए, दोहरे गजेटेड हस्ताक्षर की अनिवार्यता समाप्त की जाए और ऑनलाइन व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू किया जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
समाजसेवी ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सुधार नहीं किए गए तो आम जनता का भरोसा व्यवस्था से उठ सकता है।




















































