लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर। (आर.एन. सांवरिया)
राजस्थान पुलिस द्वारा आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय पुलिस सम्मेलन–2026 का समापन विकसित भारत के विजन को साकार करने के संकल्प के साथ संपन्न हुआ। जयपुर में आयोजित इस सम्मेलन के अंतिम दिन आधुनिक अपराधों से निपटने, नई तकनीकों के उपयोग और नवाचार आधारित पुलिसिंग रणनीतियों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास रहे। उन्होंने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से “पुलिसिंग इन विकसित भारत” विषय पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण देते हुए पुलिस अधिकारियों को मार्गदर्शन प्रदान किया। अपने दीर्घ प्रशासनिक अनुभव के आधार पर उन्होंने विकसित भारत के अनुरूप पुलिस व्यवस्था, रिकॉर्ड मैनेजमेंट, डॉक्यूमेंटेशन और कार्य संस्कृति में सुधार जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला।
महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा ने सम्मेलन के सफल आयोजन की जानकारी साझा करते हुए भविष्य की पुलिसिंग का रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान विभिन्न सत्रों में दिए गए प्रशिक्षण और चर्चाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार ये पहल विकसित भारत की परिकल्पना के अनुरूप पुलिसिंग में सकारात्मक बदलाव लाएंगी।
इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह भास्कर सावंत, डीजी ट्रेनिंग अनिल पालीवाल, आरपीए निदेशक संजीव कुमार नार्जरी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मंचासीन रहे। सम्मेलन के समापन पर आरपीए के अतिरिक्त निदेशक शंकरदत्त शर्मा ने आभार व्यक्त किया।
महिला सुरक्षा और तकनीक: प्राथमिकता में शीर्ष पर
सम्मेलन के दूसरे दिन की शुरुआत महिला सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषय से हुई। दिल्ली पुलिस के विशिष्ट पुलिस आयुक्त अजय चौधरी ने अपने व्याख्यान में कहा कि आधुनिक युग में तकनीक महिलाओं की सुरक्षा का सबसे बड़ा माध्यम बन चुकी है। उन्होंने पुलिसिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रियल-टाइम मॉनिटरिंग की भूमिका को रेखांकित करते हुए बताया कि तकनीक के माध्यम से अपराध को होने से पहले ही रोका जा सकता है।
इकोसिस्टम अप्रोच की आवश्यकता
कानून-व्यवस्था की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए उत्तर प्रदेश के आईपीएस वैभव कृष्ण ने इकोसिस्टम अप्रोच अपनाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जन आंदोलनों का स्वरूप बदल रहा है, ऐसे में पुलिस को केवल बल प्रयोग के बजाय डेटा आधारित और समन्वित रणनीति के साथ कार्य करना चाहिए।
फॉरेंसिक और अनुसंधान पर जोर
एनएफएसयू भोपाल के निदेशक डॉ. सतीश कुमार ने न्याय प्रक्रिया को तेज करने के लिए फॉरेंसिक क्षमताओं के आधुनिकीकरण पर बल दिया। उन्होंने अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं की आवश्यकता और एनसीएल नियमों की सख्ती से पालना को अनिवार्य बताते हुए कहा कि फॉरेंसिक साक्ष्य अपराधियों को सजा दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
नारकोटिक्स: युवाओं के लिए सबसे बड़ा खतरा
राजस्थान एटीएस एवं एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के आईजी विकास कुमार ने नशे को देश की युवा शक्ति के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने नशा तस्करी की रोकथाम के साथ-साथ पुनर्वास और जागरूकता पर विशेष जोर दिया और कहा कि मांग को समाप्त करना भी पुलिस की अहम जिम्मेदारी है।
आपदा प्रबंधन और विदेशी हस्तक्षेप पर मंथन
अंतिम सत्रों में एनडीआरएफ के आईजी एन.एस. बुन्देला ने आपदा प्रबंधन की बदलती चुनौतियों पर प्रकाश डाला, वहीं आईबी की संयुक्त निदेशक सत्यप्रिया सिंह ने विदेशी हस्तक्षेप और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।
सम्मेलन के समापन पर डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने अधिकारियों से आह्वान किया कि सम्मेलन में साझा किए गए नवाचारों और रणनीतियों को केवल कागजों तक सीमित न रखकर धरातल पर लागू किया जाए। उन्होंने विश्वास जताया कि नई तकनीकों और आधुनिक सोच के साथ राजस्थान पुलिस एक सुरक्षित और विकसित प्रदेश के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएगी।