पीलूपुरा में फिर गुर्जर आंदोलन

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

महापंचायत खत्म होने के बाद भरतपुर में दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक दो घंटे रहा जाम

बयाना। के पीलूपुरा इलाके में रविवार को आयोजित गुर्जर महापंचायत के बाद आंदोलनकारियों ने रेलवे ट्रैक पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति की महापंचायत समाप्त होने के बाद सैकड़ों लोगों ने सवाईमाधोपुर-मथुरा पैसेंजर ट्रेन को रोक दिया और दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक को शाम 4:30 बजे से 6:30 बजे तक जाम कर दिया।

प्रदर्शनकारियों ने ट्रैक उखाड़ने की भी कोशिश की, जिसे मौके पर पहुंची प्रशासनिक टीम ने विफल कर दिया। भरतपुर कलेक्टर, एसपी और आईजी स्तर के अधिकारी मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाइश देकर शाम साढ़े छह बजे ट्रैक को खाली कराया।

ट्रैक महापंचायत स्थल से महज 150 मीटर की दूरी पर था। पूर्व में भी इस स्थान पर कई बार आंदोलन के दौरान ट्रेनों का संचालन बाधित किया जा चुका है।

सरकार के ड्राफ्ट से असंतोष

महापंचायत में सरकार की ओर से भेजे गए आरक्षण और अन्य मांगों से संबंधित ड्राफ्ट को गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष विजय बैंसला ने पढ़कर सुनाया। हालांकि, समाज के कुछ युवाओं ने इस मसौदे पर नाराजगी जताई और विरोध किया।

महापंचायत की समाप्ति के तुरंत बाद कुछ लोग पटरी की ओर कूच कर गए और रेलवे ट्रैक पर बैठकर विरोध जताया।

अफसरों ने की समझाइश, ट्रैक हुआ खाली

घटना की सूचना मिलते ही भरतपुर आईजी राहुल प्रकाश, आईएएस नीलाभ सक्सेना, एसपी बृजेश ज्योति उपाध्याय और उत्तरप्रदेश के सरधाना विधानसभा के विधायक अतुल प्रधान मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को महापंचायत स्थल पर बुलाकर समझाइश दी।

संघर्ष समिति के संयोजक विजय बैंसला ने आश्वासन देते हुए कहा कि, “9वीं अनुसूची की चिट्ठी जल्द जारी होगी, कैबिनेट की मंजूरी भी आ जाएगी। जून के पहले हफ्ते में एक और बैठक कर बाकी मुद्दों को सुलझा लिया जाएगा।”

ट्रेनों पर असर

आंदोलन के कारण कई ट्रेनों का संचालन प्रभावित हुआ। अवध एक्सप्रेस (19037) को फतेहसिंहपुरा स्टेशन पर रोकना पड़ा, जो करीब 25 मिनट वहीं खड़ी रही। सवाई माधोपुर स्टेशन प्रबंधक लोकेंद्र मीणा के अनुसार, कोटा से दिल्ली जाने वाली कई ट्रेनों को सवाई माधोपुर पर रोकने के आदेश जारी किए गए।

पीलूपुरा शहीद स्मारक पर यह महापंचायत गुर्जर समुदाय के आरक्षण और अन्य लंबित मांगों को लेकर आयोजित की गई थी। इसी स्थान से पूर्व में भी कई बार आंदोलन की शुरुआत हुई है।

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