लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
गौतम शर्मा, राजसमंद।
राजसमंद जिले के मोही कस्बे में ठाकुर परिवार की ओर से राजपूत समाज के सामुदायिक भवन में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने धर्म, संस्कार और पारिवारिक मूल्यों से ओतप्रोत कथा का श्रवण किया। कथा व्यास पंडित विष्णुकांत शास्त्री ने अपने प्रवचनों में पारिवारिक एकता, कर्तव्यनिष्ठा और सदाचार के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि परिवार समाज की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है और परिवार में प्रेम, सम्मान तथा आपसी सामंजस्य बना रहना चाहिए। परिवार के प्रत्येक सदस्य की अपनी जिम्मेदारियां होती हैं, जिनका निष्ठापूर्वक निर्वहन करने से जीवन सफल और सुखमय बनता है। उन्होंने कहा कि जहां परिवार में कलह और मतभेद बढ़ते हैं, वहां सुख-शांति समाप्त हो जाती है।
महाभारत का उदाहरण देते हुए शास्त्री ने कहा कि पारिवारिक कलह, मोह और गलत निर्णयों के कारण एक समृद्ध वंश का विनाश हो गया। उन्होंने बताया कि धृतराष्ट्र का पुत्र मोह और कौरवों की कुसंगति उनके पतन का कारण बनी, जबकि भगवान श्रीकृष्ण के मार्गदर्शन में पांडव धर्म और सत्य के पथ पर आगे बढ़े।
उन्होंने कहा कि मनुष्य का जीवन उसकी संगति से प्रभावित होता है। अच्छी संगति व्यक्ति को ऊंचाइयों तक पहुंचाती है, जबकि बुरी संगति पतन का कारण बनती है। नशा, अहंकार और अधर्म व्यक्ति के विवेक को नष्ट कर देते हैं और अंततः विनाश की ओर ले जाते हैं।
कथा के दौरान द्रौपदी चीरहरण और जुए के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि अधर्म और अन्याय का परिणाम अंततः विनाश ही होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म, सदाचार और संस्कारों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
संगीतमय भजनों और कथा प्रसंगों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। महिलाओं और श्रद्धालुओं ने भजनों पर ताली बजाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। कथा में पंडित मनोज, पंडित गोपाल, पंडित दिनेश, पंडित मुकेश तथा जगदीश चंद्र खंडेलवाल ने संगीत सहयोग प्रदान किया। कथा पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और धर्मलाभ प्राप्त किया।
