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पंचायत चुनावों में आक्रामक बीजेपी, कांग्रेस के सामने संगठन की चुनौती!

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

निकाय चुनाव की जीत के बाद बीजेपी ने गांवों की ओर मोड़े रथ, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने संभाली पंचायत चुनाव की कमान; कांग्रेस के सामने संगठन को एकजुट करने की चुनौती

जयपुर। राजस्थान में निकाय चुनाव के बाद अब पंचायत चुनावों की सियासी बिसात बिछ चुकी है। निकाय चुनाव में मिली जीत के उत्साह के बीच बीजेपी ने अब गांवों की ओर रुख कर लिया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने जयपुर के दादिया में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जयंती समारोह के मंच से पंचायत चुनाव अभियान का आगाज किया और प्रदेशभर के लिए 90 प्रचार रथों को रवाना किया।

बीजेपी की रणनीति अब निकाय चुनाव की सफलता को पंचायत चुनावों तक ले जाने की है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के सामने निकाय चुनाव के बाद अपने संगठन को सक्रिय करने, नेताओं को एक मंच पर लाने और पंचायत स्तर तक चुनावी नेटवर्क को मजबूत करने की चुनौती है।

नितिन नवीन ने दिया अंत्योदय और जनसेवा का मंत्र

दादिया में आयोजित कार्यक्रम में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के विचार को पार्टी के चुनावी अभियान के केंद्र में रखा। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने कहा था कि दीपक की पहचान इस बात से होती है कि उसने कितनी दूर तक उजाला पहुंचाया। उन्होंने अंत्योदय का विचार दिया।

नितिन नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की योजनाएं अंत्योदय की भावना को जमीन तक पहुंचाने का काम कर रही हैं। पंचायतीराज और निकायों के जनप्रतिनिधि इन योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

निकाय चुनाव में बीजेपी की जीत का जिक्र करते हुए उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि जीत को सत्ता के रूप में नहीं, बल्कि जनसेवा के अवसर के रूप में लिया जाना चाहिए। गरीब व्यक्ति को नारायण मानकर सेवा के संकल्प के साथ आगे बढ़ने का संदेश भी उन्होंने दिया।

90 प्रचार रथों से गांव-गांव पहुंचेगा बीजेपी का संदेश

पंचायत चुनावों को लेकर बीजेपी ने संगठनात्मक स्तर पर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। नितिन नवीन ने जयपुर से 90 प्रचार रथों को प्रदेशभर के लिए रवाना किया। इन रथों के जरिए सरकार की योजनाओं और पार्टी के संदेश को पंचायत स्तर तक पहुंचाने की तैयारी है।

यानी निकाय चुनाव के बाद बीजेपी का फोकस अब शहरों से निकलकर गांवों की सरकार पर है।

भजनलाल ने गिनाईं सरकार की उपलब्धियां

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सरकार के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड भी रखा। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि सरकार ने अपने संकल्प पत्र के 78 फीसदी काम पूरे कर लिए हैं।

उन्होंने विकास को लेकर कहा कि सरकार आलू से सोना पैदा करने का दावा नहीं करती, लेकिन ऐसी नीतियों पर काम किया जा रहा है जिससे राजस्थान की जमीन सोना उगले।

बीजेपी पंचायत चुनावों में सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को भी प्रमुख मुद्दे के रूप में जनता के बीच ले जाने की तैयारी कर रही है।

मदन राठौड़ ने कांग्रेस की चुनावी सक्रियता पर उठाए सवाल

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने निकाय चुनाव में पार्टी की रणनीति और कांग्रेस के चुनावी अभियान की तुलना करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा।

राठौड़ ने कहा कि निकाय चुनाव में बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन से लेकर मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल तक के नेता मैदान में उतरे। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कई स्थानों पर रोड शो किए। प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा और दीया कुमारी समेत कई नेताओं ने चुनाव प्रचार की कमान संभाली।

राठौड़ का कहना था कि बीजेपी ने निकाय चुनाव को केवल स्थानीय नेताओं का चुनाव नहीं रहने दिया, बल्कि पूरे संगठन ने मिलकर चुनाव लड़ा।

कांग्रेस के चुनावी अभियान पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस के प्रदेश स्तर के कई बड़े नेता, पूर्व मंत्री और विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में उस स्तर पर सक्रिय नहीं दिखे, जिसकी जरूरत चुनाव में थी।

कांग्रेस के सामने संगठन को एकजुट करने की चुनौती

निकाय चुनाव के नतीजों के बाद अब पंचायत चुनाव कांग्रेस के लिए संगठनात्मक परीक्षा का अगला चरण हैं। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती नेताओं और कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाने की है।

बीजेपी लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि उसके राष्ट्रीय नेतृत्व से लेकर प्रदेश संगठन और सरकार तक चुनावी मैदान में सक्रिय हैं। ऐसे में कांग्रेस के सामने पंचायत स्तर तक अपने संगठन को सक्रिय करने और स्थानीय नेताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने की चुनौती रहेगी।

पंचायत चुनाव शहरों के निकाय चुनाव से अलग होते हैं। यहां केवल बड़े नेताओं के प्रचार से तस्वीर नहीं बदलती। बूथ स्तर का संगठन, स्थानीय समीकरण, प्रत्याशी चयन, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और सही समय पर टिकट वितरण चुनावी रणनीति के अहम हिस्से होते हैं।

बीजेपी के सामने जीत का उत्साह, कांग्रेस के सामने वापसी की चुनौती

निकाय चुनाव में मिली जीत ने बीजेपी कार्यकर्ताओं में उत्साह पैदा किया है। अब पार्टी उसी ऊर्जा को पंचायत चुनाव में इस्तेमाल करने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।

वहीं कांग्रेस के सामने निकाय चुनाव के परिणाम से उबरकर जल्द से जल्द चुनावी मोड में आने की चुनौती है। पार्टी को तय करना होगा कि पंचायत चुनाव में स्थानीय स्तर पर नेतृत्व की कमान किसे दी जाएगी और संगठन के अलग-अलग धड़ों को किस तरह एक साथ मैदान में उतारा जाएगा।

ऐसे में पंचायत चुनाव से पहले राजस्थान की सियासत में दो तस्वीरें साफ दिखाई दे रही हैं—एक तरफ बीजेपी निकाय चुनाव की जीत के बाद अपनी चुनावी मशीनरी को गांवों तक पहुंचाने में जुटी है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस के सामने अपने संगठन को फिर से सक्रिय और एकजुट करने की चुनौती है।

अब सवाल यह है कि बीजेपी की निकाय चुनाव वाली रणनीति पंचायतों में कितनी दूर तक पहुंचती है और कांग्रेस कितनी तेजी से अपने संगठन को चुनावी मोड में ला पाती है।

हालांकि अंतिम फैसला राजनीतिक दलों के बयानों से नहीं, बल्कि पंचायत चुनाव में मतदाताओं के वोट से होगा। लोकतंत्र की असली ताकत आखिरकार मतदाताओं के हाथ में ही है।

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