लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
रिया-बड़ी (नागौर)। जन्म के सिर्फ आठ महीने बाद पोलियो होने के कारण दोनों पैरों से चलने-फिरने में असमर्थ, लेकिन हौसलों ने कभी हार नहीं मानी। यही कहानी है नागौर जिले की रिया-बड़ी तहसील के धनेरिया लील गांव के ओमप्रकाश बडियासर की, जिन्होंने अपनी दिव्यांगता को चुनौती देकर राष्ट्रीय खेलों में शानदार पहचान बनाई है।
तेलंगाना के गचीबोली, हैदराबाद में 15 से 18 नवंबर 2025 तक आयोजित 25वीं राष्ट्रीय पैरा स्विमिंग चैंपियनशिप में ओमप्रकाश ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 200 मीटर आईएम में सिल्वर तथा 100 मीटर बटरफ्लाई में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।
डेढ़ साल में जीते 13 नेशनल मेडल
ओमप्रकाश 2024 से 2025 के बीच अब तक कुल 13 नेशनल मेडल जीत चुके हैं —
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7 गोल्ड
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4 सिल्वर
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2 ब्रॉन्ज
इससे पहले गोवा में हुई 24वीं राष्ट्रीय पैरा स्विमिंग चैंपियनशिप में भी वे सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीतकर चमक दिखा चुके हैं।
“सोच बदलो, सब मुमकिन है” — ओमप्रकाश
अपनी उपलब्धि पर बात करते हुए ओमप्रकाश ने कहा:
“विकलांग होने से कोई विकलांग नहीं होता, सोच को बदलो तो सब कुछ किया जा सकता है। बस हौसला और मेहनत चाहिए।”
क्षेत्र में खुशी की लहर
ओमप्रकाश की इस उपलब्धि से उनके गांव में ही नहीं, बल्कि पूरे नागौर क्षेत्र में खुशी की लहर है। उनकी जीत को अद्भुत लगन, इच्छाशक्ति और संघर्ष का प्रतीक बताया जा रहा है।
परिवार और कोच का बड़ा योगदान
ओमप्रकाश ने अपनी सफलता का श्रेय
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अपने माता–पिता,
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गुरुदेव,
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दोस्तों,
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और कोच शेराराम जी (स्विमिंग कोच)
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तथा गंगाराम जी पालियाल, संस्थापक — न्यू संकल्प इंडिया फाउंडेशन चैरिटेबल ट्रस्ट, मंडोर, जोधपुर
को दिया।










































