लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
सर्व समाज के आह्वान पर कलेक्ट्रेट का घेराव, राज्यपाल के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन; मांगें नहीं मानी तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
बारां। किसान नेता नरेश मीणा एवं अंता के पूर्व विधायक कंवरलाल मीणा की रिहाई की मांग को लेकर सोमवार को सर्व समाज के आह्वान पर बारां में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया और राज्यपाल के नाम एसडीएम रामावतार मीणा को ज्ञापन सौंपकर दोनों की रिहाई सहित विभिन्न मांगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे प्रदर्शनकारी
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत प्रदर्शनकारी भटवाड़ा-झाड़वा चौकी से रैली के रूप में रवाना हुए। रैली पब्लिक पार्क पहुंची, जहां बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए। इसके बाद प्रदर्शनकारी पैदल मार्च करते हुए बारां कलेक्ट्रेट पहुंचे।
कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों ने नरेश मीणा और कंवरलाल मीणा की रिहाई की मांग को लेकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान “नरेश मीणा को रिहा करो” और “कंवरलाल मीणा को रिहा करो” जैसे नारे लगाए गए।

नरेश मीणा के मामले में निष्पक्ष जांच की मांग
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि किसान नेता नरेश मीणा के खिलाफ झालावाड़ के कोतवाली थाने में दर्ज प्रकरण संख्या 504/2025 की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।
वक्ताओं ने उपलब्ध घटनाक्रम और वीडियो फुटेज के आधार पर लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष समीक्षा की मांग की। उनका कहना था कि यदि आरोप साक्ष्यों से प्रमाणित नहीं होते हैं तो प्रकरण की पुनः समीक्षा कर न्यायोचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि नरेश मीणा लगातार किसानों और आमजन के मुद्दों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। उनके खिलाफ दर्ज मामलों की निष्पक्ष जांच कर उन्हें न्याय दिया जाना चाहिए और तत्काल जेल से रिहा किया जाना चाहिए।
रिहाई नहीं हुई तो आंदोलन व्यापक करने की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि नरेश मीणा की रिहाई नहीं की गई तो जनआक्रोश बढ़ सकता है और आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। वक्ताओं ने इसे न्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया।
कंवरलाल मीणा की दया याचिका पर शीघ्र निर्णय की मांग
ज्ञापन में अंता के पूर्व विधायक कंवरलाल मीणा की लंबे समय से लंबित दया याचिका पर भी शीघ्र निर्णय लेने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने उनके स्वास्थ्य का हवाला देते हुए राज्यपाल से उनकी शेष सजा माफ कर तत्काल जेल से रिहा करने की मांग की।
‘न्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई’
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण आंदोलनों में भाग लेने वाले नागरिकों के साथ निष्पक्ष एवं न्यायसंगत व्यवहार सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष तक सीमित नहीं है, बल्कि न्याय, लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ी है।
प्रदर्शन के बाद राज्यपाल के नाम ज्ञापन एसडीएम रामावतार मीणा को सौंपा गया। अब प्रदर्शनकारियों की नजर सरकार और प्रशासन की ओर से होने वाली आगामी कार्रवाई पर है।