लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
हाईकोर्ट ने सरकारों से मांगा व्यापक एक्शन प्लान
राजस्थान हाईकोर्ट का स्वप्रेरणा प्रसंज्ञान; पेपर लीक, स्क्रीन टाइम, बेरोजगारी और स्कूलों की बदहाल व्यवस्था पर जताई चिंता
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने देश और प्रदेश की आने वाली पीढ़ियों Gen-Z, Gen-Alpha और Gen-Beta के भविष्य, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर महत्वपूर्ण पहल करते हुए मामले का स्वप्रेरणा प्रसंज्ञान लिया है।
जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने मामले में कहा कि आज के बच्चे ही भविष्य में देश के कार्यबल, नेतृत्व और समाज की जिम्मेदारी संभालेंगे। उन्हें मिलने वाली शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और सुरक्षित वातावरण ही आने वाले भारत की दिशा तय करेंगे।
हाईकोर्ट ने मामले को जनहित याचिका के रूप में दर्ज करते हुए केंद्र सरकार, राजस्थान सरकार, एफएसएसएआई और अन्य संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर स्टेटस रिपोर्ट और व्यापक एक्शन प्लान पेश करने के निर्देश दिए हैं।
ग्रामीण और सरकारी स्कूलों की स्थिति पर गंभीर चिंता
कोर्ट ने विशेष रूप से ग्रामीण और सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि एक ओर वर्ष 2047 और उसके बाद के भारत का नेतृत्व करने वाली नई पीढ़ी तैयार करने की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर बच्चों की बुनियादी शिक्षा से जुड़ी संस्थाएं कई आवश्यक सुविधाओं की कमी से जूझ रही हैं।
स्कूलों में बुनियादी ढांचे, प्रशिक्षित शिक्षकों, चिकित्सा सुविधाओं, पर्याप्त शौचालयों और आधुनिक तकनीक जैसी सुविधाओं को लेकर कोर्ट ने सरकारों से ठोस कार्ययोजना मांगी है।
मामले में पेपर लीक, स्क्रीन टाइम, बेरोजगारी और स्कूलों की बदहाल व्यवस्था जैसे व्यापक मुद्दों पर भी न्यायालय ने सरकारों का ध्यान आकर्षित किया है।
स्कूलों में चिप्स, कोल्ड ड्रिंक और जंक फूड पर सख्ती
बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर हाईकोर्ट ने स्कूलों में मिलने वाले खाद्य पदार्थों पर भी सख्त रुख अपनाया है।
कोर्ट ने कहा कि वर्ष 2020 में बच्चों के लिए सुरक्षित और संतुलित भोजन को लेकर बनाए गए नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं।
अंतरिम निर्देशों के तहत राजस्थान के स्कूलों में कार्बोनेटेड ड्रिंक्स, चिप्स, ट्रांस-फैट वाले बेकरी उत्पाद और High Fat, Sugar & Salt (HFSS) श्रेणी के खाद्य पदार्थों की नियमों के विरुद्ध बिक्री नहीं करने को कहा गया है।
राज्य सरकार को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि स्कूल कैंटीन अथवा स्कूल के मुख्य द्वार से 50 मीटर के दायरे में HFSS खाद्य पदार्थों की बिक्री नहीं हो।
इसके लिए जिला प्रशासन और ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्कूल कैंटीन में दिखानी होगी कैलोरी और पोषण संबंधी जानकारी
हाईकोर्ट ने स्कूलों को आठ सप्ताह के भीतर कैंटीन में उपलब्ध खाद्य पदार्थों की कैलोरी, सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी प्रदर्शित करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने बच्चों और अभिभावकों को खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और पोषण स्तर आसानी से समझाने के लिए ‘ट्रैफिक लाइट लेबलिंग’ अपनाने की बात भी कही है।
इसके अलावा प्रत्येक स्कूल में चार सप्ताह के भीतर School Food Safety and Nutrition Committee गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। समिति में शिक्षक, अभिभावक और विद्यार्थियों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा।
Gen-Z, Gen-Alpha और Gen-Beta की आवाज बनेंगे अधिवक्ता
आने वाली पीढ़ियों से जुड़े मुद्दों पर न्यायालय की सहायता के लिए हाईकोर्ट ने अलग-अलग अधिवक्ताओं के समूह को न्यायालय की सहायता करने का अनुरोध किया है।
Generation Z से जुड़े मुद्दों पर वरिष्ठ अधिवक्ता रवि भंसाली, सचिन आचार्य और विकास बालिया को न्यायमित्र नियुक्त किया गया है।
वहीं Generation Alpha की ओर से अधिवक्ता पंकज शर्मा, प्रियंका बोराणा, नमन माहेश्वरी और अविन छंगाणी न्यायालय की सहायता करेंगे।
Generation Beta से जुड़े मुद्दों पर अधिवक्ता अदिति मोदी, अक्षिति सिंघवी, निधि सिंघवी और अभिलाषा बोरा को न्यायालय की सहायता करने के लिए न्यायमित्र नियुक्त किया गया है।
केंद्र और राज्य सरकार के विधि अधिकारियों की भी मौजूदगी
केंद्र और राज्य सरकार की ओर से संबंधित पक्षों का प्रतिनिधित्व करने के लिए एएसजी भरत व्यास (Additional Solicitor General) और एडवोकेट जनरल राजेंद्र प्रसाद को भी उपस्थित रहने का अनुरोध किया गया है।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि नियुक्त न्यायमित्रों और उनके सहयोगी अधिवक्ताओं के नाम कॉज लिस्ट में प्रदर्शित किए जाएं। साथ ही आदेश की प्रति संबंधित अधिवक्ताओं को सूचना के लिए भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
आने वाली पीढ़ी के भविष्य पर कोर्ट का फोकस
हाईकोर्ट की इस पहल का व्यापक फोकस केवल स्कूलों की मौजूदा व्यवस्थाओं तक सीमित नहीं है। कोर्ट ने आने वाली पीढ़ियों की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, डिजिटल जीवन और सुरक्षा से जुड़े व्यापक मुद्दों को एक साथ देखने की जरूरत पर जोर दिया है।
साल 2047 के भारत की नींव आज के बच्चों से तैयार होगी। ऐसे में उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वस्थ वातावरण, सुरक्षित स्कूल और भविष्य के रोजगार के लिए आवश्यक कौशल उपलब्ध कराना सरकारों के सामने बड़ी जिम्मेदारी है।
