नरेश मीणा के समर्थन में हजारों छात्र सड़कों पर, मशाल जुलूस से गूंजा आक्रोश

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झालावाड़ हादसा सरकार की अनदेखी के खिलाफ फूटा आक्रोश
लोक  टुडे न्यूज नेटवर्क
जयपुर/  । झालावाड़ जिले के पिपलोदा गांव में सरकारी स्कूल की इमारत गिरने से सात मासूम बच्चों की मौत के मामले ने प्रदेशभर में जनाक्रोश भड़का दिया है। इसी कड़ी में गुरूवार देर रात हजारों छात्र-छात्राएं जयपुर और झालावाड़ की सड़कों पर उतरे और सरकार के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन किया। छात्रों ने मृतक बच्चों को न्याय दिलाने और आमरण अनशन पर बैठे युवा नेता नरेश मीणा के समर्थन में विशाल मशाल यात्रा निकाली।
छात्रों का आरोप : सरकार बन गई गूंगी-बहरी
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने आरोप लगाया कि सरकार ने दलित-आदिवासी बच्चों की मौत के मामले में सिर्फ “खानापूर्ति” की है। परिजनों को मात्र 10-10 लाख रुपये की सहायता राशि दी गई है, जबकि यदि यह बच्चे किसी अन्य वर्ग या समाज से होते तो सरकार मुआवजे की राशि करोड़ों में देती।
छात्रों ने कहा कि यह भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जब तक परिजनों को उचित मुआवजा नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
नरेश मीणा का आमरण अनशन और मांगें
गौरतलब है कि नरेश मीणा पिछले 14 दिनों से सवाई मानसिंह अस्पताल में आमरण अनशन पर हैं। वे मृतक बच्चों के परिजनों को कम से कम 50-50 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। लेकिन अब तक सरकार की ओर से उनसे वार्ता करने की कोई पहल नहीं की गई है।
युवाओं का आक्रोश और चेतावनी
मशाल यात्रा के दौरान युवाओं ने नारेबाजी करते हुए सरकार को चेतावनी दी कि अगर पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिला तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा। प्रदर्शनकारी छात्रों ने कहा कि यह सिर्फ मुआवजे की लड़ाई नहीं, बल्कि दलित-आदिवासी बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था की लड़ाई भी है।
आज होगा नरेश मीणा का अनशन समाप्त
सूत्रों के अनुसार, नरेश मीणा आज दोपहर 3 बजे मृतक बच्चों के परिजनों और उनके परिजनों के बच्चों के हाथों से ही अपना आमरण अनशन तोड़ेंगे। इससे पहले वे पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता भी प्रदान करेंगे।
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