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नरेंद्र मोदी का आदेश,हनुमान बेनीवाल की गाड़ी से उतरी लालबत्ती कैसे ?

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

नीरज मेहरा

जयपुर। पीएम मोदी के एक आदेश से वर्ष 2017 में देशभर में नेताओं – अधिकारियों की गाड़ियों से लाल- नीली बत्ती हटने लगी।  राजस्थान में वसुंधरा राजे की सरकार थी तो यहां भी मंत्रियों – अधिकारियों ने अपनी गाड़ियों से लाल बत्ती हटाना शुरु कर दिया ।  लेकिन एक निर्दलीय विधायक ने पीएम मोदी के आदेश को खुली चुनौति दे दी… और ताल ठोक दी , बोले हमारी गाड़ी से लालबत्ती नहीं हटाएंगे।  आखिर ये विधायक कौन थे जिन्होंने मोदी के आदेश को चुनौति दे दी और मोर्चा खोल दिया।

वर्ष 2014 में बीजेपी की पूर्ण बहुमत से केंद्र में सरकार बनी और नरेंद्र मोदी पीएम बने। पीएम मोदी ने देश से वीवीआईपी कल्चर खत्म करने के लिए 1मई 2017 से देशभर में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों , अधिकारियों की गाड़ियों से लाल-नीली बत्ती हटाने का ऐतिहासिक आदेश दिया।  नेताओं ने अपनी गाड़ियों से लाल बत्ती हटाना शुरु कर दिया लेकिन राजस्थान के खिंवसर से निर्देलीय विधायक हनुमान बेनिवाल ने पीएम मोदी के इस आदेश को सीधे चुनौति दे दी और बोले में अपनी गाड़ी से लालबत्ती नहीं हटाऊंगा। क्योंकि मुझे लाल बत्ती मोदी या वसुंधरा राजे ने नहीं दी है,ये बत्ती हमें जनता ने दी है ।

केंद्र सरकार ने लागू किया नियम
दरअसल केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 19 अप्रैल 2017 को मोटर वाहन नियमों में संशोधन कर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति , प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री सहित सभी के लिए लाल – नीले रंग की बत्ती का उपयोग बंद करने का ऐतिहासिक फैसला लिया।  सरकार ने 1 मई 2017 से आदेश प्रभावी ढ़ंग से लागू हो गया और देशभर में मंत्रियों , वीवीआई लोगों ने अपने वाहनों पर लगी लाल – नीली बत्ती हटाना शुरु कर दिया।  इसके साथ ही 28 साल पुरानी वीवीआईपी परम्परा खत्म हो गई।  मोदी बोले आज से देश का हर आदमी वीआईपी है। लेकिन खिंवसर से निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल ने पीएम मोदी के आदेश को मानने से साफ इंकार कर दिया और वे पहले की तरह लालबत्ती लगाकर ही जनता के बीच जाते रहे।

वसुंधरा राजे से रहा छत्तीस का आंकड़ा

उस समय राजस्थान में वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री थी । हनुमान बेनीवाल का वसुंधरा राजे से छत्तीस का आंकड़ा रहा। ….. इस समय विधानसभा चल रही थी । वे विधानसभा में भी अपनी लाल बत्ती लगी गाड़ी में पहुंचे..तो मीडिया के लोगों के निशाने पर आ गए, जब उनसे पूछा गया तो वे बोले जिस दिन पीएम मोदी या सीएम वसुंधरा राजे अपनी गाड़ी से लालबत्ती हटा लेंगी ,उस दिन में भी अपनी गाड़ी से लाल बत्ती हटा लूंगा।

बेनीवास ने खुद ने ही उतारी लाल बत्ती

हालांकि बेनीवाल ने शुरू में लाल-नीली बत्ती हटाने के आदेश का विरोध किया था और बत्ती हटाने से इंकार कर दिया।  यानी सीधा वसुंधरा राजे और मोदी सरकार से टकराव मौल ले लिया ।  बेनीवाल का ये बयान सीधे पीएम मोदी के आदेश को चुनौति दे रहा था। इस दौरान कई मंत्रियों ने से पूछने पर बोले बेनीवाल की गाड़ी से लाल बत्ती हटाने की किसी ने शिकायत नहीं की है, तो पुलिस वालों की उनकी कार से लाल बत्ती हटाने की हिम्मत नहीं हुई । वे कई दिन लाल बत्ती लगाकर गाड़ी में घूमते रहे लेकिन कुछ दिनों बाद बेनीवाल ने खुद ही अपनी गाड़ी से लाल बत्ती हटावा दी।  बोले कि वे लाल बत्ती इसलिए हटा रहे हैं क्योंकि अब प्रदेश में किसी भी नेता की गाड़ी पर लाल बत्ती नहीं है।  लेकिन बेनीवाल ने चेतावनी भरे लहजे में कहा यदि लाल-नीली बत्ती के आदेश की देश में कहीं भी अव्हेलना हुई, तो वे फिर लाल बत्ती लगा लेंगे।

विधायक नहीं लगा सकता था लाल बत्ती

हालांकि मोदी सरकार के ताजा आदेश से पहले भी किसी भी विधायक को लाल बत्ती लगाने का कोई अधिकार नहीं था। लेकिन बेनीवाल सहित कई विधायक लाल बत्ती लगाते थे और वे इसे अपना अधिकार समझते थे ।  तो देखा आपने कैसे हनुमान बेनीवाल किसी भी बड़े से बड़े नेता के सामने अड़ जाते थे, तो फिर झुकने का नाम नहीं लेते थे  । वे अपनी बात पर अडिग रहते थे. यही बात उनके राजनीतिक जीवन पर भी लागू होती है जब जिस नेता से दुश्मनी की तो उसे अंजाम तक पहुंचाया भले ही अंजाम कुछ भी हुआ हो।

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