लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
350 वर्षों पुरानी परंपरा का हुआ भव्य आयोजन
नागौर (प्रदीप कुमार डागा)। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर नागौर में पुष्करणा समाज की ओर से पारंपरिक शिवबारात ‘फक्कड़ गैर’ धूमधाम से निकाली गई। बसंत पंचमी से शीतलाष्टमी तक चलने वाले फागोत्सव कार्यक्रमों की श्रृंखला में आयोजित इस शिवबारात ने शहरवासियों को देर रात तक भक्ति और उल्लास के रंग में सराबोर रखा।
फाल्गुन कृष्ण पक्ष त्रयोदशी, रविवार रात्रि को स्थानीय गणेश मंदिर एवं नाहरसिंह भैरव, लोढ़ा का चौक से शिवबारात प्रारंभ हुई। यह बारात शहर के मुख्य मार्गों से होती हुई शिवमंदिर शिवबाड़ी पहुंची तथा इसके बाद ब्रह्मपुरी ईल्लो जी होते हुए पितीवाड़ा पहुंची, जहां यह समाज गैर में परिवर्तित हो गई। गैर में सगे-संबंधियों को ‘मीठी गार’ का गायन करते हुए श्रद्धालु देर रात तक झूमते रहे। अंत में लोढ़ा का चौक स्थित गणेश मंदिर पर “महाराज गजानंद फतेह करो” के गायन के साथ फक्कड़ गैर का विसर्जन हुआ।
350 वर्षों से निभाई जा रही परंपरा
पुष्करणा पंचायत के राजा साहब पुखराज व्यास ने बताया कि लगभग 350 वर्षों से चली आ रही शिवबारात और गैर की परंपरा इस वर्ष भी पूरे उत्साह के साथ निभाई गई। समाज कार्यकारिणी सदस्य संजय कुमार व्यास के अनुसार शिवबारात शाम 8:30 बजे मेड़ता वाड़ी नाहर भैरव मंदिर से शुरू हुई। गणेश वंदना और राजाज्ञा गायन के साथ “धुसो बाजयो रे महाराज गजैसिंह को” भजन के साथ यात्रा आगे बढ़ी।
शिवबाड़ी में “मो पे जादू डारा” एवं शिववंदना का गायन हुआ। सिधवियों की पोल, काठड़िया चौक और हाथी चौक में ‘रेखता’ फक्कड़ गायन और नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। ब्रह्मपुरी ईल्लो जी के सामने रेखता और मीठी होरी का गायन हुआ, जहां युवाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
हर भैरव मंदिर के सामने ‘लांगला भैरू’ होरी
शिवबारात मार्ग में आने वाले प्रत्येक भैरव मंदिर के सामने ‘लांगला भैरू’ होरी का पारंपरिक गायन किया गया। पितीवाड़ा पहुंचने पर यह आयोजन समाज गैर में बदल गया, जहां कोलाणी, व्यास, जोशी, आचार्य, बोहरा और पुरोहित परिवारों के सगे-संबंधियों को होरी सुनाई गई।
फागोत्सव कार्यक्रमों की शुरुआत
फक्कड़ गैर के साथ ही पुष्करणा समाज के फागोत्सव कार्यक्रमों की औपचारिक शुरुआत हो गई है, जो शीतलाष्टमी धुलिया गैर तक जारी रहेंगे। इस दौरान लोढ़ा का चौक में बैठी गैर, झाड़िया गैर, नृत्य, धुंग गैर, उबी गैर और झगड़ा गैर जैसे पारंपरिक आयोजन शहरवासियों के आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
नागौर के होली फागोत्सव में पुष्करणा समाज की विशेष पहचान है। प्राचीन परंपरा के अनुसार आज भी जोधपुर के महाराजा गजसिंह की प्रतीकात्मक आज्ञा लेने के लिए गणेश वंदना “निमो रे निमो” के बाद राजाज्ञा गायन किया जाता है, जिसके पश्चात ही फागोत्सव का शुभारंभ होता है।
शिवरात्रि और आंवला एकादशी पर निकाली जाने वाली ‘फक्कड़ गैर’ को देखने के लिए शहरवासी दूर-दूर से सिरे चौक और लोढ़ा का चौक पहुंचते हैं। आयोजन में समाज के अनेक पदाधिकारी, गणमान्य नागरिक और गैर प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।












































