लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
गंगधार (झालावाड़), सुनील निगम। मानसून की दस्तक के साथ ही सात समंदर पार से आने वाले खूबसूरत प्रवासी पक्षियों ने झालावाड़ जिले के गंगधार उपखंड में अपना डेरा जमा लिया है। हर वर्ष की तरह इस बार भी सैकड़ों की संख्या में पहुंचे ये विदेशी मेहमान क्षेत्र में मानसून के आगमन का संकेत माने जा रहे हैं। स्थानीय लोग इन पक्षियों को मानसून का संदेशवाहक मानते हैं और इनके आगमन को अच्छी बारिश का शुभ संकेत समझते हैं।
जून से अक्टूबर तक रहेगा प्रवास
प्रवासी पक्षी जून माह की शुरुआत में गंगधार पहुंचते हैं और अक्टूबर तक यहीं निवास करते हैं। इस दौरान वे घोंसले बनाकर प्रजनन करते हैं, अपने बच्चों का पालन-पोषण करते हैं और मौसम अनुकूल होने पर वापस अपने मूल स्थान की ओर लौट जाते हैं।
गंगधार क्षेत्र का प्राकृतिक वातावरण इन पक्षियों के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है। छोटी कालीसिंध नदी का किनारा, विशाल पीपल के वृक्ष, खुले मैदान और हरियाली से भरपूर खेत इन्हें सुरक्षित आवास और प्रजनन के लिए उपयुक्त वातावरण प्रदान करते हैं।
मानसून के दूत माने जाते हैं ये पक्षी
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार जैसे ही इन पक्षियों का आगमन शुरू होता है, लोग मान लेते हैं कि मानसून की शुरुआत होने वाली है। वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है और ग्रामीण क्षेत्रों में इन पक्षियों को बारिश के अग्रदूत के रूप में देखा जाता है।
किसानों के सच्चे साथी
ये प्रवासी पक्षी केवल प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं बढ़ाते, बल्कि किसानों के लिए भी बेहद उपयोगी साबित होते हैं। खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीट-पतंगों को अपना भोजन बनाकर ये प्राकृतिक रूप से कीट नियंत्रण का कार्य करते हैं। इससे किसानों को फसलों की सुरक्षा में मदद मिलती है और पर्यावरण संतुलन भी बना रहता है।
मानसून के दौरान जब तक फसल तैयार नहीं हो जाती, तब तक ये पक्षी क्षेत्र के विभिन्न पेड़ों पर निवास करते हैं और कृषि पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बने रहते हैं।
स्थानीय भाषा में कहलाते हैं ‘घोंघिल’
क्षेत्र में इन प्रवासी पक्षियों को स्थानीय भाषा में ‘घोंघिल’ के नाम से जाना जाता है। अपनी लंबी और आकर्षक चोंच तथा विशिष्ट स्वरूप के कारण ये पक्षी लोगों का ध्यान सहज ही आकर्षित कर लेते हैं।