मरीज श्रवण जांच के लिए दर-दर भटकने को मजबूर

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

दो साल से नहीं मिल रहा समाधान
महात्मा गांधी अस्पताल में ऑडियोलॉजिकल टेस्टिंग सुविधा का अभाव, गरीब और बुजुर्ग मरीजों की बढ़ी पीड़ा

भीलवाड़ा, (विनोद सेन) — शहर के प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थान महात्मा गांधी अस्पताल, भीलवाड़ा में ईएनटी (कान, नाक और गला) विभाग में ऑडियोलॉजिकल टेस्टिंग की सुविधा लंबे समय से अनुपलब्ध है। इसके कारण विशेष रूप से श्रवण बाधित, बुजुर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

जांच की सुविधा नहीं होने के कारण मरीजों को मजबूरी में जयपुर, अजमेर, उदयपुर जैसे शहरों के निजी चिकित्सा केंद्रों की ओर रुख करना पड़ता है। इससे मरीजों पर आर्थिक बोझ तो बढ़ता ही है, साथ ही समय और संसाधनों की भी बर्बादी होती है।

जयपुर रैफर से शुरू होकर अन्य राज्यों तक भटकाव
स्थानीय समाजसेवी मोहम्‍मद हारून रंगरेज ने बताया कि यह समस्या पिछले दो से तीन वर्षों से बनी हुई है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। “मरीजों को पहले जयपुर रैफर किया जाता है और वहां से कभी-कभी अन्य राज्यों तक भेजा जाता है। इस प्रक्रिया में कई मरीज इलाज के अभाव में पीड़ित रहते हैं और आर्थिक रूप से भी टूट जाते हैं,” उन्होंने बताया।

गरीब मरीजों की बढ़ती दुश्वारियां
परेशानी खासकर उन मरीजों के लिए और अधिक विकराल हो जाती है, जो पहले से ही आर्थिक रूप से कमजोर हैं। निजी चिकित्सा केंद्रों में महंगी जांच कराना उनके लिए संभव नहीं होता, जिससे वे उचित इलाज से वंचित रह जाते हैं।

जनता को समाधान की प्रतीक्षा
रंगरेज ने अस्पताल की प्रिंसिपल डॉ. वर्षा सिंह और अधीक्षक डॉ. अरुण गॉड से मांग की है कि महात्मा गांधी अस्पताल के ईएनटी विभाग में ऑडियोलॉजिकल टेस्टिंग सुविधा शीघ्र शुरू की जाए, ताकि मरीजों को राहत मिल सके और समय पर सटीक उपचार प्राप्त हो।

स्थानीय स्तर पर सुविधा से होगा व्यापक लाभ
यदि यह सुविधा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध करवा दी जाए, तो इससे न केवल आमजन की परेशानी कम होगी, बल्कि सरकारी अस्पताल की सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। अधिकारियों द्वारा एक नर्सिंग स्टाफ को बेरा जांच की ट्रेनिंग दिलवाकर लगाया गया लेकिन नाक कान गला विभाग द्वारा उसको विरोध करने पर हटा दिया गया। इससे यह प्रतीत होता है कि डॉक्टर को भी इसमें आम मरीज के हित में नहीं है
लेकिन सरकार को इस दिशा में शीघ्र निर्णय लेना चाहिए, ताकि जरूरतमंदों को राहत मिल सके।

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