लोक टुडे न्युज़ नेटवर्क
बाल कल्याण समिति अध्यक्ष ने स्वयं घर पहुंचकर ली बालिका की सुध
पादूकलां (नागौर)।
बाल कल्याण समिति न्यायपीठ, नागौर के अध्यक्ष डॉ. मनोज सोनी ने एक मानसिक रूप से निशक्त 10 वर्षीय बालिका की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए स्वयं उसके घर पहुंचकर हालात का जायजा लिया।
मामले की जानकारी चाइल्ड हेल्पलाइन और बाल अधिकारिता विभाग नागौर को मिलने के बाद यह मामला बाल कल्याण समिति के संज्ञान में आया।
जन्म से मानसिक रूप से निशक्त बालिका
सूत्रों के अनुसार, यह बालिका जन्म से ही मानसिक रूप से मंदबुद्धि (निशक्तजन) है। उसकी मां ने पारिवारिक परिस्थितियों के चलते उसे छोड़कर तलाक ले लिया, जिसके बाद बालिका की देखरेख की जिम्मेदारी उसके बुजुर्ग दादा-दादी पर आ गई।
बालिका के पिता मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं, जिसके कारण बालिका की देखभाल और सुरक्षा को लेकर परिवार संकट में था।
परिवार ने लगाई मदद की गुहार
बालिका के दादा-दादी और पिता ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चाइल्ड हेल्पलाइन नागौर और बाल अधिकारिता विभाग से सहायता की गुहार लगाई। मामला बाल कल्याण समिति तक पहुंचने पर अध्यक्ष डॉ. मनोज सोनी ने स्वयं मौके पर जाकर बालिका की स्थिति का निरीक्षण किया।
⚖️ समिति की तत्पर कार्रवाई
निरीक्षण के दौरान समिति अध्यक्ष ने देखा कि बालिका की देखरेख बुजुर्ग दादा-दादी बड़ी कठिनाई से कर रहे हैं और परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है।
डॉ. सोनी ने पूर्ण न्यायपीठ के साथ ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विधिक प्रक्रिया पूरी की।
उन्होंने बताया कि,
“बालिका के जीवन, सुरक्षा और उपचार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। समिति यह सुनिश्चित करेगी कि उसके देखरेख एवं संरक्षण के लिए उचित विधि-सम्मत व्यवस्था की जाए।”
भेजी गई मानसिक विमंदित गृह
बाल कल्याण समिति न्यायपीठ, नागौर द्वारा आदेश जारी करते हुए बालिका को मानसिक विमंदित गृह भेजने का निर्णय लिया गया है, ताकि उसे नियमित उपचार, सुरक्षित वातावरण और आवश्यक देखभाल मिल सके।
डॉ. सोनी ने कहा कि इस प्रकार के मामलों में समाज को भी आगे आकर सहयोग करना चाहिए ताकि विशेष जरूरतों वाले बच्चों को सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन


















































