लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
1100 कलशों के साथ मनाया गया वार्षिक उत्सव
कोटपूतली | एसएन राजस्थान न्यूज़
कोटपूतली क्षेत्र के कांसली गांव स्थित बाबा मंदिर आज हजारों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। वर्ष 1997 में स्थापित इस मंदिर ने समय के साथ धार्मिक, सामाजिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाई है। श्रद्धालुओं और भामाशाहों के सहयोग से मंदिर का लगातार विकास हुआ है।
1997 में हुई थी मंदिर की स्थापना
मंदिर समिति के अनुसार बाबा मंदिर की स्थापना वर्ष 1997 में हुई थी। इसके बाद बढ़ती श्रद्धा और जनसहयोग से मंदिर परिसर का विस्तार किया गया, जहां बालाजी मंदिर, शिव मंदिर और संतोषी माता मंदिर की भी स्थापना की गई। आज यह परिसर क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। 
1100 कलशों के साथ निकली भव्य कलश यात्रा
हर वर्ष 1 जुलाई को बाबा मंदिर का वार्षिक उत्सव धार्मिक उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर विशाल कलश यात्रा और भव्य भंडारे का आयोजन किया जाता है।
मंदिर समिति ने बताया कि शुरुआत में कलश यात्रा केवल 151 कलशों के साथ निकाली जाती थी, लेकिन बाबा की कृपा और श्रद्धालुओं की बढ़ती आस्था के चलते अब इसमें लगभग 1100 महिलाएं कलश लेकर शामिल होती हैं, जिससे यह आयोजन क्षेत्र के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शामिल हो गया है।
श्रद्धालुओं के सहयोग से होता है पूरा आयोजन
समय के साथ भंडारे का स्वरूप भी लगातार बढ़ा है। वर्तमान में भंडारे में बड़ी मात्रा में चावल, आटा, देशी घी, सूखे मेवे, सब्जियां और अन्य खाद्य सामग्री का उपयोग किया जाता है।
मंदिर की सबसे विशेष बात यह है कि यहां किसी प्रकार का अनिवार्य चढ़ावा नहीं लिया जाता। पूरे आयोजन और मंदिर के संचालन का खर्च श्रद्धालुओं, ग्रामवासियों और भामाशाहों के स्वैच्छिक सहयोग से पूरा किया जाता है। मंदिर समिति के अनुसार वार्षिक खर्च करीब 25 लाख रुपये तक पहुंच चुका है, जिसे पूरी तरह भक्तजन मिलकर वहन करते हैं।
वर्षभर होते हैं धार्मिक आयोजन
बाबा मंदिर में वर्षभर विभिन्न धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। हरितालिका तीज, बड़ी पंचमी, महाशिवरात्रि, देवझूलनी एकादशी, जन्माष्टमी, गोवर्धन पूजा तथा श्रावण मास के दौरान विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन होते हैं।
सप्तमी के अवसर पर भजन संध्या और प्रसादी वितरण का आयोजन किया जाता है, जबकि अन्य प्रमुख पर्वों पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
सामाजिक समरसता का बना प्रतीक
कांसली का बाबा मंदिर आज केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सेवा भावना और जनसहयोग का भी प्रेरणादायी उदाहरण बन चुका है। श्रद्धालुओं के सहयोग से संचालित यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ समाज को एकजुट करने का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है।