Home latest किसान का बेटा कैसे बना विधानसभा उपाध्यक्ष ?

किसान का बेटा कैसे बना विधानसभा उपाध्यक्ष ?

0

लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

कांग्रेस के वफादार सिपाही रामनारायण मीणा की अनकही राजनीतिक कहानी

जयपुर | नीरज मेहरा

राजस्थान की राजनीति में कुछ चेहरे ऐसे भी हैं जिन्होंने बिना किसी राजनीतिक विरासत, बिना किसी बड़े गॉडफादर और बिना किसी गुट की छत्रछाया के सिर्फ संघर्ष, सादगी और जनसेवा के दम पर अपनी पहचान बनाई। ऐसे ही नेताओं में एक नाम है पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष और पांच बार विधायक रहे रामनारायण मीणा का।

बूंदी जिले के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे रामनारायण मीणा ने छात्र राजनीति से शुरुआत की, वकालत की, खेत-खलिहानों से जुड़ाव बनाए रखा और फिर विधानसभा से लेकर संसद तक का सफर तय किया। लेकिन सवाल यह है कि जिस नेता ने कांग्रेस को बार-बार जीत दिलाई, उसे कभी वह सम्मान क्यों नहीं मिला जिसका वह हकदार था?

छात्रसंघ अध्यक्ष से विधायक तक का सफर

1 अगस्त 1943 को बूंदी जिले के रायथल गांव में जन्मे रामनारायण मीणा ने प्रारंभिक शिक्षा गांव में प्राप्त की। बाद में कोटा और बूंदी के राजकीय महाविद्यालयों से स्नातक एवं एलएलबी की पढ़ाई की। छात्र जीवन में ही वे बूंदी कॉलेज छात्रसंघ अध्यक्ष बने और यहीं से राजनीति में उनकी सक्रिय भूमिका शुरू हुई।

युवक कांग्रेस और सेवादल में काम करते हुए उन्होंने संगठन में मजबूत पहचान बनाई। वकालत और खेती-किसानी के साथ-साथ वे लगातार जनसंपर्क में सक्रिय रहे। उनकी सादगी और सहज व्यवहार ने उन्हें ग्रामीण इलाकों में लोकप्रिय बना दिया।

जहां कांग्रेस हारती थी, वहां जीतकर दिखाया

1977 में कांग्रेस ने उन्हें नैनवां विधानसभा सीट से टिकट दिया और वे चुनाव जीत गए। इसके बाद पार्टी ने दो चुनावों तक उन्हें टिकट नहीं दिया, लेकिन जब 1990 में फिर मौका मिला तो वे जीतकर विधानसभा पहुंचे।

1993 में भी उन्होंने जीत दोहराई। 1996 में कोटा लोकसभा सीट से मात्र 685 वोटों से हार गए, लेकिन 1998 में उसी सीट से सांसद बनकर संसद पहुंच गए।

सबसे दिलचस्प बात यह रही कि कांग्रेस ने उन्हें अक्सर उन सीटों पर भेजा जहां पार्टी कमजोर थी या लगातार हार रही थी। चाहे नैनवां हो, उनियारा हो या पीपल्दा—रामनारायण मीणा ने अपनी व्यक्तिगत छवि और जनाधार के दम पर कांग्रेस को जीत दिलाई।

पांच बार विधायक, एक बार सांसद… लेकिन मंत्री कभी नहीं

राजनीतिक जीवन में पांच बार विधायक और एक बार सांसद बनने के बावजूद रामनारायण मीणा कभी मंत्री नहीं बन सके। कांग्रेस की सरकारें आती रहीं, जूनियर नेताओं को मंत्री पद मिलते रहे, लेकिन रामनारायण मीणा हमेशा इंतजार करते रहे।

संगठन में भी उन्हें कभी कोई बड़ा पद नहीं मिला। वर्ष 2012 में अशोक गहलोत सरकार के दौरान उन्हें राजस्थान विधानसभा का उपाध्यक्ष बनाया गया। यही उनके राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा संवैधानिक पद रहा।

क्या गुटबाजी बनी सबसे बड़ी बाधा?

राजस्थान कांग्रेस लंबे समय से गुटबाजी से जूझती रही है। अशोक गहलोत और सचिन पायलट खेमों की राजनीति के बीच रामनारायण मीणा कभी किसी गुट का हिस्सा नहीं बने।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनकी सबसे बड़ी ताकत—सादगी और संगठन के प्रति निष्ठा—ही उनकी सबसे बड़ी कमजोरी बन गई। उन्होंने कभी पद के लिए दबाव नहीं बनाया, न ही सार्वजनिक नाराजगी दिखाई। परिणामस्वरूप वे सत्ता की राजनीति में लगातार पीछे छूटते गए।

कांग्रेस में आदिवासी नेतृत्व का संकट

रामनारायण मीणा खुलकर कहते रहे हैं कि कांग्रेस ने राजस्थान में मजबूत आदिवासी नेतृत्व विकसित नहीं होने दिया। उनका सवाल रहा है कि आज प्रदेश में ऐसा कौन सा बड़ा एसटी चेहरा है जिसके नाम पर कांग्रेस वोट मांग सके?

उनका मानना है कि गुटबाजी और व्यक्तिगत राजनीति ने संगठन को कमजोर किया है और जमीन से जुड़े नेताओं को हाशिये पर धकेल दिया है।

2023 में टिकट भी नहीं

लगातार जीत दिलाने वाले इस वरिष्ठ नेता को 2023 विधानसभा चुनाव में टिकट तक नहीं मिला। यही वह फैसला था जिसने राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज कर दी कि क्या कांग्रेस ने अपने सबसे अनुभवी और स्वीकार्य नेताओं में से एक की उपेक्षा की है?

बड़ा सवाल

रामनारायण मीणा की कहानी सिर्फ एक नेता की कहानी नहीं है। यह उस राजनीति का आईना भी है जिसमें वफादारी, सादगी और संगठन के प्रति समर्पण हमेशा पुरस्कार नहीं दिलाते।

आज भी हाड़ौती और पूर्वी राजस्थान में रामनारायण मीणा का सम्मान बरकरार है। लेकिन सवाल कायम है—क्या कांग्रेस ने अपने एक अनुभवी, निर्विवाद और सर्वस्वीकार्य नेता को समय रहते उचित सम्मान नहीं दिया, या फिर बदलती राजनीति में अनुभव की जगह सीमित होती जा रही है?

इस सवाल का जवाब शायद आने वाला समय देगा, लेकिन इतना तय है कि किसान के बेटे से विधानसभा उपाध्यक्ष बनने तक का रामनारायण मीणा का सफर राजस्थान की राजनीति का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version