लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
राजेश-सचिन पायलट के जिक्र से गरमाई पूर्वी राजस्थान की सियासत
नीरज मेहरा वरिष्ठ संवाददाता
दौसा। राजस्थान की राजनीति में पूर्वी राजस्थान का गुर्जर-मीणा सामाजिक समीकरण एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। दौसा के नांगल प्यारीवास में विश्व आदिवासी दिवस समारोह के दौरान कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने गुर्जर और मीणा समाज को एक-दूसरे का पूरक बताते हुए आपसी भाईचारा बनाए रखने की अपील की। उनके बयान का सबसे चर्चित हिस्सा पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत राजेश पायलट और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को लेकर था।
किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि राजेश पायलट और सचिन पायलट को राजस्थान की राजनीति में स्थापित करने में दौसा के मीणा समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके इस बयान के बाद सियासी हलकों में सवाल उठने लगा है कि आखिर किरोड़ी ने राजेश और सचिन पायलट का जिक्र इसी समय क्यों किया और इसके पीछे क्या राजनीतिक संदेश है?

गुर्जर-मीणा समाज को बताया एक-दूसरे का पूरक
नांगल प्यारीवास में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। इसी दौरान डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने दोनों समाजों के बीच सामाजिक रिश्तों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गुर्जर और मीणा मूल रूप से किसान समाज हैं और दोनों समुदायों की जीवनशैली में कई समानताएं हैं।
उन्होंने खेतों की मेड़, खेती-किसानी, बोली और रहन-सहन का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों समाजों के बीच किसी भी तरह का टकराव नहीं होना चाहिए। किरोड़ी ने गुर्जर और मीणा समाज की तुलना राम और लक्ष्मण की जोड़ी से करते हुए आपसी भाईचारा बनाए रखने की अपील की।
उनका संदेश था कि राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं अपनी जगह हैं, लेकिन उनके कारण दोनों समाजों के बीच सामाजिक दूरी या कटुता नहीं बढ़नी चाहिए।
राजेश पायलट और सचिन पायलट का जिक्र क्यों?
किरोड़ी लाल मीणा के बयान का सबसे ज्यादा राजनीतिक महत्व उनके द्वारा राजेश पायलट और सचिन पायलट का नाम लिए जाने में देखा जा रहा है। उन्होंने गुर्जर समाज को संबोधित करते हुए कहा कि राजेश पायलट और सचिन पायलट को स्थापित करने में मीणा समाज का बड़ा योगदान रहा है।
यहां यह समझना जरूरी है कि किरोड़ी के इस बयान को उनके व्यक्तिगत राजनीतिक समर्थन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनका संदर्भ मुख्य रूप से दौसा और पूर्वी राजस्थान में मीणा समाज के राजनीतिक प्रभाव से जुड़ा दिखाई देता है।
दौसा और आसपास के क्षेत्रों में लंबे समय से मीणा समाज का मजबूत सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव रहा है। राजेश पायलट के दौर में भी मीणा समाज के एक बड़े हिस्से का समर्थन कांग्रेस और राजेश पायलट के साथ रहा। बाद में सचिन पायलट की राजनीति में भी इस सामाजिक समीकरण की भूमिका दिखाई देती रही।
1996 में आमने-सामने थे राजेश पायलट और किरोड़ी
किरोड़ी के बयान को समझने के लिए वर्ष 1996 का दौसा लोकसभा चुनाव भी महत्वपूर्ण है। इस चुनाव में कांग्रेस के राजेश पायलट और बीजेपी के टिकट पर डॉ. किरोड़ी लाल मीणा आमने-सामने थे।
यह सीधा राजनीतिक मुकाबला था और राजेश पायलट ने चुनाव में जीत दर्ज की थी। ऐसे में यह कहना कि डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने व्यक्तिगत तौर पर राजेश पायलट की राजनीतिक जमीन मजबूत की, इतिहास के इस चुनावी तथ्य से मेल नहीं खाता।
हालांकि, किरोड़ी के बयान का संदर्भ व्यक्तिगत राजनीतिक समर्थन से ज्यादा मीणा समाज के सामूहिक राजनीतिक प्रभाव की ओर माना जा सकता है। एक तरफ नेता चुनावी मैदान में आमने-सामने हो सकते हैं, लेकिन दूसरी तरफ किसी क्षेत्र या समाज का राजनीतिक समर्थन अलग दिशा में हो सकता है।
यही अंतर किरोड़ी के बयान को समझने में अहम है।
पूर्वी राजस्थान में गुर्जर-मीणा समीकरण क्यों महत्वपूर्ण?
पूर्वी राजस्थान में गुर्जर और मीणा दोनों ही प्रभावशाली सामाजिक समूह हैं। दौसा, करौली, सवाई माधोपुर, टोंक और आसपास के इलाकों में दोनों समुदायों की सामाजिक मौजूदगी चुनावी राजनीति को प्रभावित करती रही है।
पंचायत चुनाव से लेकर नगर निकाय, विधानसभा और लोकसभा चुनाव तक जातीय और सामाजिक समीकरणों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। ऐसे में दोनों समाजों के बीच राजनीतिक दूरी या नजदीकी का असर चुनावी परिणामों पर भी पड़ सकता है।
यही वजह है कि किरोड़ी लाल मीणा का गुर्जर समाज को सीधे संबोधित करते हुए भाईचारे की अपील करना राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पांचना बांध विवाद के बीच बयान के बढ़े मायने
गुर्जर और मीणा समाज के बीच कुछ मुद्दों को लेकर समय-समय पर मतभेद सामने आते रहे हैं। पांचना बांध से जुड़े विवाद ने भी दोनों समुदायों के बीच राजनीतिक और सामाजिक दूरी की चर्चा को बढ़ाया।
ऐसे माहौल में किरोड़ी का सार्वजनिक मंच से यह कहना कि दोनों समाज एक-दूसरे के पूरक हैं और उन्हें आपस में नहीं लड़ना चाहिए, एक तरह से सामाजिक दूरी कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
किरोड़ी ने गुर्जर समाज की राजनीतिक आकांक्षाओं का जिक्र करते हुए यह भी संकेत दिया कि किसी समाज के नेता को सत्ता के शीर्ष तक पहुंचाने के लिए व्यापक सामाजिक समर्थन जरूरी होता है।
क्या पंचायत चुनाव से पहले सियासी संदेश?
राजस्थान की राजनीति में पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों का अपना अलग महत्व है। इन चुनावों में स्थानीय सामाजिक समीकरण कई बार विधानसभा और लोकसभा चुनावों से भी ज्यादा प्रभावी दिखाई देते हैं।
ऐसे में गुर्जर और मीणा समाज के बीच बेहतर तालमेल की अपील को आने वाले चुनावों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
किरोड़ी का संदेश मोटे तौर पर यही दिखाई देता है कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा अपनी जगह हो सकती है, लेकिन सामाजिक रिश्तों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।
किरोड़ी के बयान का असली सियासी संदेश क्या?
किरोड़ी लाल मीणा के बयान को सिर्फ सामाजिक सद्भाव की अपील मानना पूरी तस्वीर नहीं हो सकती। पूर्वी राजस्थान में दोनों समाजों की राजनीतिक ताकत को देखते हुए यह बयान संभावित सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश भी माना जा सकता है।
राजेश पायलट और सचिन पायलट का जिक्र करते हुए किरोड़ी ने एक तरफ मीणा समाज की राजनीतिक भूमिका को रेखांकित किया, वहीं गुर्जर समाज को यह संदेश देने की कोशिश की कि राजनीतिक सफलता के लिए सामाजिक टकराव के बजाय सहयोग जरूरी है।
आखिर में सवाल यही है कि क्या किरोड़ी लाल मीणा का यह बयान सिर्फ गुर्जर-मीणा भाईचारे की अपील है या फिर पूर्वी राजस्थान में नए राजनीतिक समीकरण की जमीन तैयार करने की कोशिश?
आने वाले पंचायत, विधानसभा और लोकसभा चुनावों में गुर्जर-मीणा रिश्तों की दिशा इस सवाल का जवाब देने में अहम भूमिका निभा सकती है।