लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में खेजड़ी सहित अन्य महत्वपूर्ण वृक्ष प्रजातियों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए नया सख्त कानून लाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
राज्य सरकार ने ‘वृक्ष संरक्षण विधेयक’ का प्रारूप तैयार करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति की पहली बैठक सोमवार सुबह संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल की अध्यक्षता में उनके आवास पर आयोजित की गई।
बैठक में ये रहे उपस्थित
बैठक में
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राजस्व एवं उपनिवेशन मंत्री हेमन्त मीणा
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वन मंत्री संजय शर्मा
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विधि विभाग के प्रमुख शासन सचिव
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राजस्व विभाग के शासन सचिव
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विधि विशेषज्ञ
सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
अन्य राज्यों के कानूनों का किया अध्ययन
बैठक में वृक्षों के संरक्षण के लिए मजबूत और प्रभावी कानून बनाने को लेकर अन्य राज्यों में लागू वृक्ष संरक्षण कानूनों का तुलनात्मक अध्ययन किया गया। विधेयक के प्रारूप को अंतिम रूप देने से पहले संबंधित विभागों, विधि विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों के सुझावों पर भी विचार किया जा रहा है।
समिति की अगली बैठक 11 मार्च को आयोजित की जाएगी।
नए कानून में होंगे कड़े प्रावधान
वर्तमान में कृषि भूमि पर पेड़ों की कटाई की अनुमति और अवैध कटाई पर दंड का प्रावधान काश्तकारी कानून में है। प्रस्तावित नए कानून के तहत—
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आवंटित, रूपांतरित, अधिग्रहित और आबादी भूमि सहित सभी गैर-कृषि उपयोग वाली भूमि पर भी वृक्ष संरक्षण के प्रावधान लागू होंगे।
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किसी भी पेड़ को हटाने से पहले प्राधिकृत अधिकारी की अनुमति अनिवार्य होगी।
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केवल आवश्यक और न्यूनतम पेड़ों को ही हटाने की अनुमति दी जाएगी।
राज्य सरकार का मानना है कि इस नए कानून से खेजड़ी जैसे पारंपरिक और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण वृक्षों का संरक्षण सुनिश्चित होगा तथा प्रदेश में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।



















































