अमृता देवी विश्नोई और 363 वृक्ष शहीदों की याद में खेजड़ली में आयोजित मेला, मारवाड़ के कोने-कोने से पहुंचे श्रद्धालु
लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
दयाल सिंह सांख्ला ब्यूरो चीफ जोधपुर
जोधपुर (खेजड़ली) – जोधपुर के खेजड़ली गांव में पेड़ों की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले 363 शहीदों की याद में आज बलिदान दिवस पर भव्य मेला आयोजित हुआ। यह मेला हर साल श्रद्धा और परंपरा के साथ भरा जाता है। इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, केंद्रीय कौशल एवं उद्यमी मंत्री जयंत चौधरी, राजस्थान के कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल, राजस्थान के मंत्री के.के. विश्नोई सहित कई अन्य राजनीतिक और सामाजिक नेता शहीदों को नमन कर श्रद्धांजलि देने के लिए उपस्थित रहे। प्रदेश और मारवाड़ के कोने-कोने से बिश्नोई समाज के लोग भी इस आयोजन में शामिल हुए और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए यज्ञ में आहुति दी।
मेला में मारवाड़ी परंपरागत वेशभूषा में सजी महिलाओं, युवतियों और अन्य श्रद्धालुओं ने स्मृति स्मारक की परिक्रमा की और यज्ञ में आहुति देकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति संकल्प लिया। पूरे मेला परिसर में बिश्नोई समाज के आराध्य गुरु जंभेश्वर भगवान का जयघोष लगातार गूंजता रहा।
खेजड़ली की यह धरती 15वीं सदी का महत्वपूर्ण इतिहास समेटे हुए है। उस समय जब जोधपुर के महाराजा ने एक छोटे से गांव में पेड़ काटने का आदेश दिया, तो अमृता देवी विश्नोई ने इसका विरोध करते हुए कहा, “सिर साटे रूंख रहे, तो भी सस्तौ जाण।” अमृता देवी और उनकी तीन बेटियों ने पहले पेड़ से लिपटकर बलिदान दिया, जिसके बाद आसपास के 84 गांवों के लोग भी पेड़ों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने के लिए आगे आए। इस तरह कुल 363 बिश्नोई महिला-पुरुषों ने अपने प्राणों की आहुति देकर पेड़ों की रक्षा की।
आज भी यह मेला न केवल इन शहीदों को श्रद्धांजलि देने का अवसर है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जीव-प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देने का माध्यम भी है। खेजड़ली मेला मारवाड़ में बिश्नोई समाज का एक प्रकार का “कुंभ” माना जाता है, जहां हर साल समाज के लोग एकजुट होकर पर्यावरण और जीव रक्षा का संकल्प दोहराते हैं।










































