लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
त्याग, संतोष और गौसेवा से ही मिलता है जीवन का सच्चा सुख : संत सुखदेव महाराज
पादूकलां। (राकेश उपाध्याय) निकटवर्ती ग्राम लांपोलाई स्थित श्री श्याम गौशाला परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्री भक्तमाल कथा के द्वितीय दिवस श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा वाचक संत श्री सुखदेव महाराज ने संत महापुरुषों के त्याग, सेवा, वैराग्य और भक्ति से जुड़े प्रेरक प्रसंगों का वर्णन करते हुए जीवन में संतोष, सदाचार और सेवा भाव अपनाने का संदेश दिया।
संत सुखदेव महाराज ने कहा कि सच्चा संत कभी संग्रह नहीं करता, बल्कि आवश्यकता भर साधनों का उपयोग कर अपना जीवन प्रभु भक्ति और लोककल्याण के लिए समर्पित करता है। उन्होंने कहा कि अधिक संग्रह मनुष्य को मोह, चिंता और दुख की ओर ले जाता है, जबकि त्याग और संतोष से आत्मिक शांति एवं सच्चे सुख की प्राप्ति होती है।
कथा के दौरान उन्होंने संत कबीरदास की वाणी तथा विभिन्न संत-महापुरुषों के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि सेवा, साधना, सत्संग और प्रभु स्मरण ही जीवन को सफल और सार्थक बनाते हैं। उन्होंने गौसेवा को सर्वोच्च पुण्य बताते हुए कहा कि गौमाता भारतीय संस्कृति की आधारशिला हैं तथा गौसंरक्षण से समाज में करुणा, संवेदनशीलता और धार्मिक संस्कारों का विकास होता है।
महाराज ने श्रद्धालुओं से मधुर वाणी बोलने, परोपकार करने तथा समाज में प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को बढ़ावा देने का आह्वान किया। कथा के दौरान पूरा पांडाल “जय श्रीराम” और “राम नाम” के जयघोषों से गुंजायमान रहा। स्थानीय महिलाओं, पुरुषों, युवाओं एवं बुजुर्गों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर कथा का श्रवण किया।
आयोजन को संत श्री पांचाराम महाराज का पावन सानिध्य प्राप्त हो रहा है। आयोजन समिति एवं ग्रामवासियों द्वारा श्रद्धालुओं के लिए समुचित व्यवस्थाएं की गई हैं। कथा के समापन पर महाआरती का आयोजन हुआ तथा श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
इस अवसर पर आयोजन समिति के पदाधिकारी, गौशाला प्रबंधन समिति के सदस्य, महिला शक्ति एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। आयोजकों ने अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण कर धर्मलाभ अर्जित करने का आह्वान किया।