लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
“पंखों की उड़ान और आर्द्रभूमियों की पुकार” के साथ संरक्षण का उत्सव शुरू
जयपुर (आर एन सांवरिया)। जयपुर में कानोता कैंप रिजॉर्ट, जामडोली में शनिवार को जयपुर बर्ड फेस्टिवल–2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। “Join the Celebration of Wings & Wetlands” थीम पर आधारित यह दो दिवसीय राज्य स्तरीय आयोजन पक्षियों और आर्द्रभूमियों के संरक्षण को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाने का प्रमुख मंच बन गया।
आयोजन और सहभागिता:
फेस्टिवल का आयोजन ग्रीन पीपल सोसायटी (जयपुर चैप्टर) ने राजस्थान सरकार, वन विभाग और WWF इंडिया के सहयोग से किया। उद्घाटन में संरक्षण विशेषज्ञ, शिक्षाविद, विद्यार्थी और प्रकृति प्रेमियों की गरिमामय उपस्थिति रही। ग्रीन पीपल सोसायटी के उपाध्यक्ष एवं संयोजक विक्रम सिंह (सेवानिवृत्त आईएएस) ने बताया कि जयपुर बर्ड फेस्टिवल, राष्ट्रीय पहचान बना चुके उदयपुर बर्ड फेस्टिवल से प्रेरित है और यह पहल शहर में संरक्षण जागरूकता के लिए मील का पत्थर साबित होगी।
पहले दिन की गतिविधियाँ:
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नेचर क्विज, पेंटिंग प्रतियोगिता, बर्ड फोटोग्राफी और बटरफ्लाई प्रदर्शनी
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25+ पक्षियों की बर्ड वाचिंग सत्र के जरिए बच्चों और युवाओं को पक्षियों के आवास, भोजन, प्रवास और प्रजनन की जानकारी
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लाइव बटरफ्लाई लाइफ साइकल और 2,000+ पक्षी-आधारित डाक टिकटों की फिलैटली प्रदर्शनी
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फोटो, पेंटिंग, लाइव पेंटिंग और ओरिगामी/किरिगामी आर्ट
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बच्चों के गाल और ललाट पर रंग-बिरंगे पक्षियों के टेटू
कार्यशालाएँ और सम्मेलन:
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लगभग 30 रिसोर्स पर्सन्स के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला
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15 उभरते लेखकों के लिए लेखन कार्यशाला
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राज्य स्तरीय सम्मेलन में वन, पर्यावरण और संरक्षण विषयों पर गहन विमर्श
दूसरे दिन का कार्यक्रम:
रविवार को प्रतिभागी सांभर साल्ट लेक, बरखेड़ा–चंदलाई–मुहाना क्षेत्र, केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, तालछापर अभयारण्य और रणथम्भौर/सरिस्का टाइगर रिज़र्व का फील्ड विजिट करेंगे।
विशेष अतिथि और सहभागिता:
फेस्टिवल में वरिष्ठ पक्षीविद, संरक्षण विशेषज्ञ, WWF इंडिया CEO, रिटायर्ड आईएएस/सीएस/आईपीएस अधिकारी, फोटोग्राफर और आउल/रैप्टर एक्सपर्ट शामिल हैं। फ्रांसीसी पर्यटक बुदवा डू पोंट और उनकी पत्नी ओडिल ने भी बच्चों के उत्साह को देखकर प्रसन्नता जताई और संरक्षण के महत्व पर जोर दिया।
जयपुर बर्ड फेस्टिवल–2026 ने पहले दिन ही बच्चों और युवाओं में प्रकृति प्रेम, संवेदनशीलता और रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से संरक्षण संदेश फैलाने में सफलता प्राप्त की है।