लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
*जितेन्द्र सिंह शेखावत* वरिष्ठ पत्रकार
*जयपुर वाले भंवरजी राजस्थान की राजनीति के सिरमोर नेता रहे । उन पर “कभी भी” ... भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा । एक नेता ने विधान सभा मै भंवर जी पर आरोप लगाया था।* *मुख्यमंत्री थे भैरों सिंह शेखावत ।*
*शेखावत ने कहा ..* *इन पर लगाया कोई* *आरोप साबित हो जाए तो मैं* *त्यागपत्र देकर राजनीति को छोड़ दूंगा ।सच में भंवरजी ने अपने जीवन की अंतिम सांस तक सादगी को नहीं छोड़ा *।वो ही एक ऐसे सच्चे मंत्री रहे जिन्होंने कभी भी सरकारी कार और सरकारी बंगले का सुख नहीं भोगा । आडम्बर और झूठ फरेब से दूर रहने वाले भंवरलाल जी किसी सुरक्षा के तामझाम को ताक में रख पैदल चलते । आम जनता के दिल में राज करने वाले शर्मा जी विधान सभा के कई चुनाव तो चुटकियों में जीत जाते थे। प्रचार के लिए उन्होंने कभी जीप का भी इस्तेमाल नहीं किया । पैदल चल कर ही चुनाव जीत जाते थे।
सच्ची राजनीति करने वाले भंवरजी का आज कोई उदाहरण नहीं मिल सकता है।
नगर परिषद के सफाई कर्मियों की हड़ताल के दौरान उन्होंने ट्रेक्टर चलाया और लोगों के साथ शहर को साफ करनें में शर्म महसूस नहीं की ।
आज चुनाव जीतने के लिए लोगों को धन लगाकर भी एडी चोटी का जोर लगाना पड़ता है ।
उस समय जयपुर में सच्चे नेताओं की टीम थी।
भंवर जी, गिरधारी लालजी, सतीश चन्द्र अग्रवाल, उजला अरोड़ा और भैरो सिंह शेखावत,
ओम प्रकाश गुप्ता आदि थे। ये सब बिना खर्चे के आसान से चुनाव जीत जाते थे । भंवरजी एक ऐसे जाबाज मंत्री रहे जिन्होंने किसी बड़ी ताकत की परवाह नहीं की और अपनी सच्ची बात को मनवाने की आदत थी । प्रदेश भाजपा के कई बार अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री रहे भंवरजी बहुत दबंग और निडर भी थे। नाहरगढ़ से पुरानी बस्ती के प्राचीन रास्ते से जिप्सी चलाकर उतर जाते थे। उनके साथ बैठे लोग डर के मारे कांप जाते थे।
भंवर जी ने वरिष्ठ पत्रकार रहे बिशन सिंह शेखावत को एक साक्षात्कार में कहा था कि … राजनीति में सेवा भाव खत्म हो चुका है। दिल से सेवा का काम ढूंढने पर भी दिखाई नहीं पड़ता । उनका मानना था कि बजट में गरीबों के लिए अधिक धन आवंटित किया जाए ।भंवरलाल शर्मा ने अपना सामाजिक जीवन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की शाखा में सन् 1946 से जाना शुरू किया था । संघ पर प्रतिबंध लगाने पर वे कुछ दिन जेल में भी रहे । इसके बाद जयपुर में चले चुंगी आंदोलन, सैल्स टेक्स वृद्धि, जयपुर में हाईकोर्ट की स्थापना जैसे आंदोलनों में सक्रिय रहे और जेल भी गए । आपातकाल में छह महीनों तक छिपे रहकर पार्टी के लोगों को संगठित करने के बाद जेल गए ।
1977 में जनता शासन आने पर भैरो सिंह शेखावत सरकार में स्वास्थ्य शासन मंत्री बने । शुद्ध व्यक्तिगत चरित्र सादगी और झंझट वाली राजनीति से दूर हटकर सीधी सच्ची बात करने के कारण यह लोगों के दिल में राज करते रहे मोहनलाल शर्मा ने 1961 में तीन बार लगातार नगर परिषद के सदस्य चुने गए । सन् 19 61 में नगर परिषद के अध्यक्ष निर्वाचित हुए ।संघ में रहते हुए इन्होंने दादाओ की चौथ वसूली के खिलाफ युवकों का संगठन तैयार कर मुकाबला किया था ।











































