लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
— अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में उठे सीमा सुरक्षा के मुद्दे
जोधपुर से रिपोर्ट: बृजकिशोर पारीक
जोधपुर। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के विधि संकाय एवं सीमाजन कल्याण समिति राजस्थान के संयुक्त तत्वावधान में पी.एम. उषा प्रायोजित त्रिदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन विभिन्न तकनीकी सत्रों में सीमा सुरक्षा, जनसांख्यिकीय परिवर्तन और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई।
प्रथम तकनीकी सत्र में लगभग 35 और द्वितीय सत्र में करीब 32 प्रतिभागियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने अवैध सीमा पार गतिविधियां, मादक पदार्थों की तस्करी, नशा नियंत्रण के उपाय, घुसपैठ, प्रवासन की बढ़ती प्रवृत्ति तथा सीमावर्ती गांवों से पलायन रोकने के उपायों पर विचार रखे।
सत्रों में अवैध बांग्लादेशी एवं रोहिंग्या प्रवासन से जनसांख्यिकीय परिवर्तन, सीमा प्रबंधन की आवश्यकता, भारत की पश्चिमी सीमा की चुनौतियां तथा पाकिस्तान से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं पर भी चर्चा की गई। कुछ वक्ताओं ने जनसांख्यिकीय बदलाव को राष्ट्र की एकता और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताया।

प्रमुख अतिथि और वक्ता
प्रथम सत्र में मुख्य अतिथि प्रो. राजश्री चौधरी (मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर) रहीं। सत्र की अध्यक्षता डॉ. अशोक कुमार, विभागाध्यक्ष, मिलिट्री साइंस विभाग, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय ने की।
मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. प्रदीप नारायण पांडे (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली) ने सीमा प्रबंधन के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. प्रतीक (दिल्ली विश्वविद्यालय) एवं डॉ. रविकांत मोदी (जयपुर) उपस्थित रहे।
विशिष्ट व्याख्यान में सीमाजन कल्याण समिति राजस्थान के प्रांत उपाध्यक्ष बंशी लाल भाटी ने मतांतरण की रोकथाम, अधिकार एवं कर्तव्यों पर अपने विचार व्यक्त किए।
मेजर जनरल नरपत सिंह राजपुरोहित, अध्यक्ष पूर्व सैनिक परिषद राजस्थान ने सीमा क्षेत्रों में नागरिकों की भूमिका और युद्धकालीन दायित्वों पर प्रकाश डाला।
डॉ. सुमित्रा कार्की, निदेशक, एनआईआईसी नेपाल ने सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर अपना व्याख्यान दिया।

विभिन्न संगठनों की सहभागिता
कार्यक्रम में सीमा जागरण मंच के अखिल भारतीय संयोजक मुरलीधर भिंडा तथा सीमाजन कल्याण समिति के प्रदेश मंत्री स्वरूप दान का भी सानिध्य प्राप्त हुआ।
संगोष्ठी में सीमा सुरक्षा, जनसंख्या संतुलन, प्रवासन और राष्ट्रीय हितों से जुड़े विषयों पर गहन विमर्श हुआ, जिसे प्रतिभागियों ने समकालीन परिप्रेक्ष्य में अत्यंत प्रासंगिक बताया।

















































