लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
रमा निगम वरिष्ठ साहित्यकार एवं/ पत्रकार
गंगधार, झालावाड़
किसी भी विधा को जानने, समझने और सीखने के लिए उसका परिचय, इतिहास और महत्व जानना अत्यंत आवश्यक होता है। इससे न केवल विद्यार्थियों को उस विषय की पृष्ठभूमि समझने में सहायता मिलती है, बल्कि विषय के प्रति उनकी रुचि और जुड़ाव भी बना रहता है। हस्तरेखा विज्ञान के संदर्भ में यह समझना विशेष रूप से जरूरी है कि यह केवल भविष्य बताने की विधा नहीं है, बल्कि आत्मज्ञान और मानव मनोविज्ञान को समझने का एक सशक्त माध्यम भी है।
हस्तरेखा विज्ञान एक ऐसा अध्ययन है, जिसमें हथेली पर उपस्थित रेखाओं, पर्वतों, चिन्हों, तिल-धब्बों और उनकी बनावट का विश्लेषण किया जाता है। हथेली पर मौजूद प्रत्येक आकृति और निशान व्यक्ति के आंतरिक गुणों, मानसिक प्रवृत्तियों और बाहरी जीवन के अनुभवों का संकेत देते हैं। इस विज्ञान का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति को उसकी क्षमताओं, संभावनाओं और कमजोरियों से अवगत कराना है, ताकि वह स्वयं को बेहतर ढंग से समझ सके और अपने जीवन को सही दिशा प्रदान कर सके।
किसी भी ज्ञान-विधा का विकास एक दिन में नहीं होता। इसके विकसित होने और व्यापक रूप से स्वीकार किए जाने में लंबा समय लगता है। जब यह विकास एक लंबी यात्रा तय कर लेता है, तो वह इतिहास का हिस्सा बन जाता है। भारत में हस्तरेखा विज्ञान का इतिहास लगभग 5000 वर्ष पुराना माना जाता है। प्राचीन भारत से उत्पन्न यह विद्या चीन, तिब्बत, मिस्र और यूरोप के कई देशों तक फैली हुई है। यह तथ्य इसके प्राचीन और वैश्विक स्वरूप को प्रमाणित करता है।
इतिहास के इस व्यापक परिप्रेक्ष्य को जानने के बाद यह स्पष्ट हो जाता है कि हस्तरेखा विज्ञान केवल अंधविश्वास नहीं, बल्कि एक प्राचीन और व्यवस्थित ज्ञान प्रणाली है। इसका महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह मानव मनोविज्ञान की गहरी समझ प्रदान करता है। इसके माध्यम से व्यक्ति स्वयं को समझने के साथ-साथ दूसरों के स्वभाव, प्रवृत्तियों और व्यवहार को भी बेहतर ढंग से समझ सकता है।
हस्तरेखा शास्त्र व्यक्ति को उसके कार्यक्षेत्र, नौकरी, व्यवसाय, स्वास्थ्य और जीवन की संभावित दिशाओं के विषय में मार्गदर्शन प्रदान करता है। इससे व्यक्ति अपने जीवन से जुड़े निर्णय अधिक विवेकपूर्ण ढंग से ले सकता है और अपने जीवन को उन्नत, स्वस्थ एवं संतुलित बना सकता है।
हस्तरेखा विज्ञान का इतिहास और शिक्षकीय दृष्टिकोण से परिचय जनमानस में व्याप्त भ्रांतियों और गलतफहमियों को दूर करने में सहायक है। इसे केवल भविष्यवाणी करने का साधन मानना इसकी व्यापकता को सीमित करना है। वास्तव में यह व्यक्ति की अंतर्निहित क्षमताओं और प्रवृत्तियों को उजागर करने वाला एक प्रभावी माध्यम है।
अतः हस्तरेखा विज्ञान को मात्र भविष्य की घटनाओं की भविष्यवाणी करने वाली विधा के रूप में नहीं, बल्कि एक प्राचीन, मनोवैज्ञानिक और आत्मज्ञान का सशक्त उपकरण मानकर समझा जाना चाहिए।
















































