लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
हमारी सामूहिक सोच में यह धारणा गहराई तक बैठी हुई है कि हार्ट अटैक अचानक आता है। लोग अक्सर सुनते हैं – “वह व्यक्ति तो एकदम स्वस्थ लग रहा था, अचानक गिर पड़ा और मौत हो गई।” लेकिन हाल ही की चिकित्सा शोध और चिकित्सकों के अनुभव इस मिथक को तोड़ते हैं। हार्ट अटैक अचानक नहीं आता, बल्कि यह वर्षों पहले से चेतावनियाँ देता है।
चिकित्सा दृष्टिकोण – 12 साल पहले शुरू होते हैं संकेत
अपोलो हॉस्पिटल्स के डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि हार्ट अटैक के लक्षण कई बार 10 से 12 साल पहले दिखने लगते हैं। इनमें प्रमुख हैं:
1. रेड फ्लैग सिग्नल्स – साल–दर–साल स्टैमिना कम होना।
2. सहनशक्ति में गिरावट – पहले जो दूरी या काम आसानी से हो जाता था, अब उसमें जल्दी थकावट।
3. ब्रिस्क वॉक या सामान्य व्यायाम में दिक़्क़त – 1 घंटे में 5 किमी चलने में परेशानी, साँस फूलना।
4. ब्रैथलेसनेस और एनर्जी की कमी – सीढ़ियाँ चढ़ने या हल्के–फुल्के काम में भी ज़्यादा थकान।
ये सब वे संकेत हैं जिन्हें हम अक्सर उम्र बढ़ने का सामान्य परिणाम मानकर अनदेखा कर देते हैं, जबकि यही हार्ट अटैक की शुरुआती चेतावनी हो सकते हैं।
समाज का रवैया – “अनदेखी” सबसे बड़ी गलती
समस्या यह है कि लोग लक्षणों को गंभीरता से नहीं लेते। सांस फूलना, सीने में जकड़न या थकान को लोग गैस, बढ़ती उम्र या लाइफस्टाइल पर दोष देकर टाल देते हैं।
नियमित हेल्थ चेकअप कराने से कतराते हैं।
और जब तक डॉक्टर तक पहुँचते हैं, तब तक धमनियों में ब्लॉकेज खतरनाक स्तर तक पहुँच चुका होता है।
यह केवल व्यक्तिगत लापरवाही नहीं है, बल्कि हमारे समाज में प्रिवेंटिव हेल्थ के प्रति उदासीनता का परिणाम भी है।
जीवनशैली और हार्ट अटैक
भारत में हृदय रोगों की बढ़ती संख्या का एक बड़ा कारण है हमारी जीवनशैली।
फास्ट फूड, अत्यधिक नमक–शक्कर–तेल का सेवन।
तनावग्रस्त जीवन, नींद की कमी और लगातार स्क्रीन टाइम। व्यायाम का अभाव और बढ़ती मोटापा दर। धूम्रपान और शराब जैसी लतें।
ये सब मिलकर हमारे दिल पर धीरे–धीरे बोझ डालते हैं, जो एक दिन हार्ट अटैक के रूप में सामने आता है।
अभिभावक और सामाजिक जिम्मेदारी
दिलचस्प तथ्य यह है कि शोध केवल बुजुर्गों पर लागू नहीं होता। 30 से 40 वर्ष की उम्र में भी हार्ट अटैक के केस बढ़ रहे हैं। ऐसे में माता–पिता और परिवार की जिम्मेदारी है कि:
बच्चों में बचपन से ही स्वस्थ आदतें विकसित करें। नियमित एक्सरसाइज और खेलकूद को जीवनशैली का हिस्सा बनायें। परिवार में हेल्थ चेकअप की संस्कृति को अपनायें।
समाधान – रोकथाम ही सबसे बड़ा इलाज
हार्ट अटैक से बचाव किसी चमत्कार से नहीं बल्कि नियमित देखभाल और जागरूकता से संभव है।
नियमित चेकअप – ब्लड प्रेशर, शुगर, कोलेस्ट्रॉल की जाँच समय–समय पर कराते रहें।
व्यायाम – रोजाना कम से कम 30 मिनट तेज़ चाल से चलना या योग।
संतुलित आहार – फल, सब्ज़ी, अनाज और कम वसा वाला भोजन।
तनाव प्रबंधन – ध्यान, प्राणायाम और पर्याप्त नींद। धूम्रपान और शराब से दूरी।
एक चेतावनी, एक अवसर
हार्ट अटैक मौत की सज़ा नहीं, बल्कि शरीर का अलार्म है। अगर हम इन शुरुआती चेतावनियों को समय रहते पहचान लें तो न केवल जीवन बचाया जा सकता है, बल्कि लंबे समय तक स्वस्थ और सक्रिय रहा जा सकता है।
यह समझना होगा कि दिल की बीमारी अचानक नहीं आती, यह धीरे–धीरे वर्षों तक दस्तक देती रहती है। बस ज़रूरत है सही समय पर उस दस्तक को सुनने की। दिल की सुरक्षा मंदिर की घंटी जैसी है – समय रहते सुनोगे तो जीवन की पूजा बनी रहेगी, अनदेखा करोगे तो जीवन की लौ अचानक बुझ सकती है।










































