लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
समदड़ी ।
समदड़ी में बुधवार को जैनाचार्य श्री विजय वल्लभ सूरीश्वर जी महाराज की 71वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर गुरु मूर्ति पर माल्यार्पण कर 66 दीपक प्रज्वलित किए गए। देशभर में शिक्षा, संस्कार, नारी उत्थान, साधर्मिक सेवा, साहित्य प्रकाशन, स्वदेश प्रेम और व्यसनमुक्ति जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले इस धर्मगुरु की स्मृति में कार्यक्रम का आयोजन हुआ।
चातुर्मास के लिए समदड़ी में विराजमान ज्ञान प्रभाकर आचार्य जयानंद सूरीश्वर महाराज ने धर्मसभा में कहा कि जैनाचार्य विजय वल्लभ सूरीश्वर जी महाराज ने भारत विभाजन के समय पाकिस्तान से सकल जैन समाज को सुरक्षित लाने का कार्य किया। उन्होंने भगवान महावीर के अहिंसा, सत्य, अनेकांत और अपरिग्रह सिद्धांतों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया। गुजराती होते हुए भी उन्होंने हिंदी भाषा को अपनाया और खादी वस्त्र धारण कर जीवनभर सादगी का उदाहरण प्रस्तुत किया।
आचार्य ने बताया कि पंजाब, हरियाणा, गुजरात और महाराष्ट्र में शिक्षण संस्थाओं की स्थापना की गई। 106 वर्ष पुरानी श्री महावीर जैन विद्यालय संस्था इन सभी संस्थाओं की अग्रणी संस्था है। जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, सौराष्ट्र और महाराष्ट्र जैसे प्रांतों में 67 वर्षों तक पैदल विचरण कर समाज सेवा की। उनके कार्यों से हर धर्म, जाति और वर्ग के लोग प्रभावित हुए। जैन विश्व विद्यालय स्थापित करने की उनकी अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए समाज निरंतर प्रयासरत है।
गणिवर्य जयकीर्ति विजय मसा ने कहा कि गुरुदेव का आध्यात्मिक जीवन उच्च आदर्शों से परिपूर्ण था। उन्होंने अनेक ग्रंथों, स्तवनों, पूजाओं और छंद काव्यों की रचनाएँ कीं। साधु जीवन के नियमों का कठोर पालन करते हुए उनके प्रवचनों में दस-दस हजार की भीड़ जुटती थी।
इस अवसर पर चातुर्मास कार्यक्रम में पु. गणिवर्य जयकीर्ति विजय मसा, पु. मुनिराज दिव्यांशु विजय मसा, पु. मुनि चारित्रवल्लभ विजय मसा, पु. मुनि चैत्यवल्लभ विजय मसा, पु. हेमलता मसा, पु. ज्योतिप्रज्ञा मसा, पु. जिनप्रज्ञा मसा, पु. केवल्यप्रज्ञा मसा, पु. हितप्रज्ञा मसा सहित अनेक जैन मुनि और साधु-संत शामिल हुए। साधु-संतों का विश्राम मदनलाल लूणीया कामदार के निवास पर रखा गया।
समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर गुरुदेव के जीवन और शिक्षाओं से प्रेरणा ग्रहण करते दिखे।

















































