लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
कायस्थ समाज ने पारंपरिक वेशभूषा में किया पूजन, बच्चों को दिया शिक्षा का संदेश
गंगधार, झालावाड़ (सुनील निगम)। झालावाड़ जिला के गंगधार कस्बे सहित देशभर में आज चित्रगुप्त पूजा श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई। सुबह से ही कायस्थ समाज के लोग अपने-अपने घरों में पूजा-अर्चना में जुटे रहे। पारंपरिक वेशभूषा में सजे समाज के लोगों ने बच्चों के साथ अपने आराध्य की आराधना की।
कायस्थ समाज में चित्रगुप्त पूजा को ‘कलम-दवात पूजा’ के नाम से भी जाना जाता है। इस अवसर पर समाज के लोगों ने चित्रगुप्त की तस्वीर के सामने कलम, दवात और बही-खाते रखकर विधि-विधान से पूजा की। विद्यार्थियों ने अपनी किताबें रखकर कलम-दवात की पूजा की और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान चित्रगुप्त का स्मरण किया।
पूजन के पश्चात बच्चों ने बुजुर्गों से आशीर्वाद लिया। बुजुर्गों ने उन्हें शिक्षा का महत्व बताते हुए कहा कि ज्ञान ही मनुष्य का सबसे बड़ा हथियार है। साथ ही उन्होंने समाज हित में कार्य करने और अपनी परंपराओं का पालन करने की प्रेरणा दी।
कौन हैं चित्रगुप्त?
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान चित्रगुप्त को सृष्टि के प्रत्येक जीव के कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाला देवता माना जाता है। कहा जाता है कि वे मनुष्य के अच्छे-बुरे कर्मों का हिसाब रखते हैं।
कायस्थ समाज के लोगों का कहना है कि कलम-दवात की पूजा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि शिक्षा, ज्ञान और न्याय के सम्मान का प्रतीक है। उनका मानना है कि कलम के बिना ज्ञान संभव नहीं, इसलिए इस दिन कलम-दवात की पूजा विशेष महत्व रखती है।


















































