लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
गंगधार, झालावाड़।
झालावाड़ जिले के गंगधार उपखंड क्षेत्र में इन दिनों जंगल पलाश के फूलों से सजे हुए हैं। जहां नजर डालें, वहां टेसू के नारंगी-लाल फूलों की बहार दिखाई दे रही है। देखने में आकर्षक ये फूल न केवल प्राकृतिक सौंदर्य बढ़ाते हैं, बल्कि धार्मिक, ज्योतिषीय और आयुर्वेदिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
पलाश के फूलों को टेसू के नाम से भी जाना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस चमत्कारी पुष्प में त्रिदेव—ब्रह्मा, विष्णु और महेश—का वास माना जाता है। मान्यता है कि घर में पलाश के फूल रखने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मंगल व शनि ग्रह शांत होकर शुभ फल प्रदान करते हैं। ज्योतिष में पलाश से जुड़े कुछ विशेष उपाय भी बताए गए हैं, जिनके प्रभाव से ग्रह-नक्षत्रों का शुभ असर बढ़ता है और धन-धान्य की कमी नहीं रहती।
आयुर्वेद में भी विशेष महत्व
आयुर्वेद में पलाश के फूलों के कई लाभ बताए गए हैं। पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में इसका उपयोग विभिन्न रोगों के उपचार में किया जाता रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग इसके औषधीय गुणों पर भरोसा करते हैं।
होली पर बनते हैं प्राकृतिक रंग
गंगधार सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में होली के अवसर पर टेसू के फूलों से पारंपरिक रंग तैयार किए जाते हैं। धुलेंडी, रंगपंचमी और रंगतेरस पर लोग इन प्राकृतिक रंगों से उत्सव मनाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि टेसू से बने रंग त्वचा के लिए हानिकारक नहीं होते और पर्यावरण के अनुकूल होते हैं।
प्रकृति की इस अनमोल देन ने इन दिनों गंगधार क्षेत्र के जंगलों को जहां खूबसूरत बना दिया है, वहीं होली के पारंपरिक रंगों की तैयारी को भी नई ऊर्जा दे दी है।