लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
पादूकलां। अक्षय तृतीया (आखातीज) का पर्व इस बार क्षेत्र में दो दिन तक आस्था और परंपरा के साथ मनाया गया। सोमवार सुबह किसानों ने अपने-अपने खेतों में पहुंचकर पारंपरिक ‘हळोतिया’ रस्म निभाई और अच्छी बारिश व समृद्ध फसल की कामना की।
खेतों में पूजा और हल चलाने की परंपरा
किसानों ने सूखी जमीन पर हल चलाकर धरती माता की पूजा की और आगामी कृषि सत्र के लिए शुभ संकेत लिया। इस दौरान खेतों में पारंपरिक विधि से पूजा-अर्चना की गई।
घरों में बने पारंपरिक व्यंजन
हळोतिया के बाद घरों में बाजरे का खीच, लापसी, हलवा और मीठी गलवाणी जैसे पारंपरिक व्यंजन बनाकर भगवान को भोग लगाया गया।
कई गांवों में दिखा उत्साह
पादूकलां के आसपास के धाधलावास, रलियावता, लांपोलाई, मेवड़ा, खानपुरा, थाट, शबेड़ास खुर्द, नथावड़ा, डोडियाना, सथानाकलां, केरिया माकड़ा और पादूखुर्द सहित कई गांवों में किसानों ने उत्साहपूर्वक परंपरा निभाई।
सीआर चौधरी ने निभाई परंपरा
सीआर चौधरी ने भी अपनी पत्नी के साथ खेत में पहुंचकर हल चलाया और विधिवत पूजा-अर्चना की। उन्होंने इसे किसानों की आस्था और प्रकृति के प्रति श्रद्धा का प्रतीक बताया।
️ अच्छी बारिश की उम्मीद
सीआर चौधरी ने कहा कि यह परंपरा समृद्धि और अच्छे कृषि उत्पादन का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस वर्ष अच्छी बारिश होगी और किसानों की फसलें भरपूर होंगी, जिससे क्षेत्र में खुशहाली आएगी।