लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ लिविंग को बढ़ावा देने के लिए अनावश्यक अनुपालन और विनियमों को चरणबद्ध रूप से कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास के निर्देशन में तैयार कार्ययोजना के तहत भू-उपयोग, भवन निर्माण, श्रम, लाइसेंस प्रक्रिया और जन उपयोगिता सेवाओं में व्यापक सरलीकरण किया जाएगा।
भू-उपयोग और भवन नियमों में बदलाव
राज्य सरकार मिश्रित भूमि-उपयोग को “जब तक निषिद्ध न हो, तब तक अनुमत” सिद्धांत पर स्वतः स्वीकृति देने पर विचार कर रही है। बिल्डिंग बायलॉज और मास्टर प्लान में संशोधन के साथ जोन-वार निषिद्ध सूची स्पष्ट की जाएगी। ऊंचाई और सेटबैक संबंधी प्रावधानों को तर्कसंगत बनाते हुए फायर सेफ्टी में ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिस अपनाई जाएगी।
औद्योगिक क्षेत्रों को मिलेगा बढ़ावा
औद्योगिक क्लस्टर्स में खाली पड़ी भूमि के बेहतर उपयोग, श्रमिकों के लिए सस्ते आवास और फायर सेफ्टी व अपशिष्ट उपचार जैसी सुविधाओं के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
सिंगल प्वाइंट कॉन्टैक्ट और लाइसेंस सरलीकरण
भवन, निर्माण और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लाइसेंस के लिए नोडल एजेंसियों को सिंगल प्वाइंट कॉन्टैक्ट बनाया जाएगा। व्यवसायों के लिए दोहरे लाइसेंस की आवश्यकता समाप्त करने हेतु अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग) की अध्यक्षता में वर्किंग ग्रुप गठित किया जाएगा।
दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को सूचना के आधार पर डीम्ड लाइसेंसिंग के माध्यम से आजीवन पंजीकरण और 24×7 संचालन की अनुमति देने पर भी विचार हो रहा है।
एमएसएमई और डिजिटल सुधार
एमएसएमई के लिए राज्य-स्तरीय टेस्टिंग सुविधाओं की एकीकृत डायरेक्टरी तैयार की जाएगी। साथ ही, सभी कानूनों, नियमों और सरकारी आदेशों की केंद्रीकृत डिजिटल रिपॉजिटरी बनाई जाएगी।
राज्य सरकार इन सुधारों को लागू करने के लिए केंद्र सरकार से प्राप्त ड्राफ्ट के आधार पर एक विधेयक लाने की तैयारी कर रही है। उल्लेखनीय है कि सरकार पहले ही न्याय एवं विश्वास आधारित विनियमन को बढ़ावा देने के लिए “राजस्थान जन विश्वास अधिनियम” लागू कर चुकी है और बजट 2026-27 में “राजस्थान जन विश्वास अधिनियम 2.0” लाने की घोषणा की गई है।
