लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
राजस्थान मॉडल अपनाने की मांग
अजमेर। संवाददाता: नितिन मेहरा
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के आरक्षण को लेकर राजस्थान में एक बार फिर आंदोलन की आहट सुनाई दे रही है। राजस्थान पर्यटन विकास निगम के पूर्व चेयरमैन धर्मेंद्र राठौड़ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजते हुए केंद्र सरकार से ईडब्ल्यूएस प्रावधानों को राजस्थान मॉडल की तरह सरल बनाने की मांग की है।
राठौड़ की मुख्य बातें
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केंद्र सरकार ने 2019 में 10% ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू किया, लेकिन जटिल शर्तों के कारण इसका लाभ कृषक वर्ग और महिलाओं तक नहीं पहुँच पा रहा है।
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यूपीएससी और एसएससी जैसी प्रमुख भर्तियों में ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों की संख्या एससी/एसटी से 2.5 से 4 गुना तक कम है।
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केंद्र की भूमि और संपत्ति संबंधी शर्तें अवास्तविक और जांच योग्य नहीं हैं।
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राजस्थान में सिर्फ 8 लाख रुपये वार्षिक आय की शर्त लागू है, जिससे लाखों युवाओं को फायदा हुआ है।
राठौड़ ने कहा कि राजस्थान मॉडल की वजह से राज्य में राजपूत, ब्राह्मण, वैश्य समेत कई जातियों के युवाओं ने सरकारी नौकरियों में कदम रखा है और सामाजिक पुनरुत्थान हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र ने मांगें नहीं मानीं, तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
केंद्र और राजस्थान में ईडब्ल्यूएस आरक्षण का अंतर
केंद्र सरकार की शर्तें
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परिवार की आय 8 लाख रुपये से अधिक न हो।
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5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि न हो।
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1000 वर्ग फुट से बड़ा आवासीय फ्लैट न हो।
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नगरपालिका क्षेत्र में 100 वर्ग गज और ग्रामीण क्षेत्र में 200 वर्ग गज से बड़ा आवासीय प्लॉट न हो।
राजस्थान सरकार की शर्तें
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केवल परिवार की आय 8 लाख रुपये से अधिक न हो।
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भूमि या प्लॉट की कोई शर्त नहीं।
आगे की रणनीति
ज्ञापन के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि राठौड़ वंचित जातियों को लाभ दिलाने के लिए बड़ा आंदोलन खड़ा कर सकते हैं। ईडब्ल्यूएस समुदाय उन्हें “चलता-फिरता मंडल आयोग” कहकर संबोधित करता है।















































