लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अपशिष्ट से स्वच्छ ऊर्जा का अभियान देश को प्रदान कर रहा है नई दिशा:– मदन राठौड़
राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ के सवाल के जवाब में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गेस मंत्रालय में राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने सदन को दी जानकारी
जयपुर।आर एन सांवरिया राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (एमएसडब्ल्यू) से संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) और जैविक खाद के उत्पादन को प्रोत्साहित कर रही है। इसके लिए ‘सरकार का संपूर्ण दृष्टिकोण’ अपनाया गया है, जिसमें कई मंत्रालयों और विभागों को समन्वित रूप से सम्मिलित किया गया है। सरकार ने दीर्घकालिक समझौतों (एमपीएटीए), मूल्य निर्धारण, केंद्रीय वित्तीय सहायता, नियामक मान्यता एवं बाजार विकास सहायता सहित अनेक रणनीतिक पहल प्रारंभ की हैं। स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2.0 के तहत भी नगरपालिका अपशिष्ट आधारित सीबीजी परियोजनाओं को विशेष सहयोग मिल रहा है। राठौड़ ने बताया कि सीजीडी (सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन) नेटवर्क के माध्यम से सीबीजी को सीएनजी के साथ समन्वित किया जा रहा है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिल रहा है। सीबीजी संयंत्रों की स्थापना के लिए पाइपलाइन तथा बुनियादी ढांचे के विस्तार हेतु निर्देश एवं योजनाएं भी लागू की गई हैं। इसके अलावा, सरकार ने वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन के लिए MRF, कम्पोस्टिंग प्लांट, बायो-मिथिनेशन प्लांट, RDF प्रसंस्करण, प्लास्टिक अपशिष्ट सुविधाएं, अपशिष्ट से ऊर्जा संयंत्र आदि की स्थापना को प्रोत्साहन दिया है। राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ के सवाल के जवाब में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने सदन को यह जानकारी दी।
राज्यसभा सांसद एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने बताया कि अब तक देश में नगरपालिका अपशिष्ट-आधारित सीबीजी संयंत्रों की संख्या 16 है, जिनकी कुल स्थापित क्षमता 2043 टन प्रतिदिन (टीडीपी) है। इसके अतिरिक्त, सीवेज स्लज आधारित सीबीजी संयंत्रों की संख्या 5 है, जिनकी कुल स्थापित क्षमता 808 एमएलडी है। विशेष रूप से राजस्थान के जयपुर स्थित ब्रजधाम पॉवर प्राइवेट लिमिटेड संयंत्र की स्थापित क्षमता 87.5 एमएलडी है, जो राज्य के लिए गौरव का विषय है। एमएसडब्ल्यू आधारित सीबीजी परियोजनाओं की स्थापना स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाती है, लैंडफिल का बोझ कम करती है, मीथेन जैसी हानिकारक गैसों के उत्सर्जन को नियंत्रित करती है और प्रदूषण के स्तर में उल्लेखनीय कमी लाती है। अपशिष्ट संसाधित होकर स्वच्छ ऊर्जा और जैविक खाद में परिवर्तित होता है, जिससे ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर भी निर्मित होते हैं। राठौड़ ने बताया कि यह अभिनव दृष्टिकोण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और सतत विकास की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। भारत सरकार सतत विकास और हरित ऊर्जा की दिशा में लगातार ऐतिहासिक कदम उठा रही है, जिससे देश का पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों मजबूत हो रहे है।














































