लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
रिपोर्ट: गौतम शर्मा
राजसमंद। जिले की झोर पंचायत के पास स्थित चावण्ड मंगरी की 12खेड़ा पहाड़ी पर विराजित चामुंडा माता मंदिर क्षेत्र की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां प्रत्येक रविवार को विशेष पूजा-अर्चना और आरती का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचकर माता के दर्शन करते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, यह मंदिर करीब 500 वर्ष पुराना है, जबकि लगभग 17 वर्ष पूर्व इसका भव्य निर्माण गांव झोर के सोहनलाल चपलोत द्वारा कराया गया था। मंदिर में पूजा-अर्चना की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। पहले नारू लाल लोहार, फिर डालूराम लोहार और गोमाराम लोहार ने सेवा दी, वर्तमान में पिंटू लोहार द्वारा पूजा-अर्चना की जा रही है।
मंदिर से जुड़ी आस्थाएं इसे और भी विशेष बनाती हैं। मान्यता है कि बीमार व्यक्ति को जब बैलगाड़ी से माता के दरबार में लाया जाता है, तो वह स्वस्थ होकर पैदल लौटता है। इसी विश्वास के चलते दूर-दराज से लोग यहां अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं।
चैत्र नवरात्रि के दौरान मंदिर में नौ दिनों तक अखंड ज्योत प्रज्वलित रहती है और विशेष पूजा-अर्चना के साथ गवरी का आयोजन किया जाता है। इस दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।
ग्रामीणों के अनुसार, वर्षों पहले यहां 12खेड़ा गांव बसा हुआ था, जो समय के साथ आसपास के गांवों में विस्थापित हो गया। नवरात्रि में भोपाजी द्वारा की जाने वाली “बंचावनी” (भविष्यवाणी) श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है, जिसे लोग काफी सटीक मानते हैं।
गांव के शिवराम जाट ने बताया कि जब मंदिर की नींव की खुदाई की गई, तब करीब 8 फीट गहराई तक खुदाई के बावजूद माता की प्रतिमा का आधार नजर नहीं आया, जो इस स्थल की प्राचीनता और रहस्य को दर्शाता है।
मंदिर में होने वाले धार्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं और माता से अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की कामना करते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, चामुंडा माता न केवल लोगों के रोग हरती हैं, बल्कि मवेशियों को भी बीमारियों से मुक्ति दिलाती हैं।


















































