भीलवाड़ा में राष्ट्र सेविका समिति का शक्ति संगम पथ संचलन आयोजित

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

संस्थापक दिवस एवं संघ शताब्दी वर्ष के अवसर पर विजयादशमी पर मातृशक्ति की अद्भुत कदमताल

भीलवाड़ा, संवाददाता – पंकज पोरवाल

राष्ट्र सेविका समिति के स्थापना दिवस और संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष की भांति इस बार भी विजयादशमी पर भीलवाड़ा विभाग द्वारा शक्ति संगम पथ संचलन का आयोजन किया गया।


शस्त्र पूजन और उद्घाटन कार्यक्रम

संचलन से पूर्व दोपहर 3 बजे शस्त्र पूजन के साथ विजयादशमी उत्सव मनाया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक (समग्र शिक्षा) डॉ. कल्पना शर्मा, मुख्य वक्ता के रूप में अखिल भारतीय व्यवस्था प्रमुख वंदना वजीरानी, और चित्तौड़ प्रांत बौद्धिक प्रमुख सुशीला पारीक उपस्थित रहीं।

मुख्य अतिथि डॉ. शर्मा ने “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की संकल्पना के साथ महिलाओं को समरसता और राष्ट्र उत्थान में सक्रिय भागीदारी निभाने का संदेश दिया।

मुख्य वक्ता वंदना वजीरानी ने कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष पर राष्ट्र सेविका समिति के माध्यम से महिलाओं का सशक्तिकरण हो रहा है। उन्होंने नन्ही सेविकाओं की सराहना करते हुए कहा कि हमारी गणवेश स्वाभिमान का प्रतीक है और नारी अबला नहीं, बल्कि सबला है।


पथ संचलन का मार्ग और सहभागिता

संचलन का आरंभ राजेंद्र मार्ग विद्यालय से हुआ और संकट मोचन बालाजी, गोल प्याऊ चौराहा, रेलवे स्टेशन, झूलेलाल सर्किल, सत्यनारायण मंदिर, आजाद चौक, प्रताप टॉकीज रोड, मिनी मॉल, सूचना केन्द्र, भोपाल क्लब, पुलिस थाना, आयुर्वेदिक हॉस्पिटल, फतेह टावर, बाटा शोरूम, सिटी कोतवाली होते हुए पुनः राजेंद्र मार्ग विद्यालय पर समाप्त हुआ।

22 वाहिनियों में 5 वर्ष से 80 वर्ष तक की सेविकाओं ने भाग लिया। भीलवाड़ा सहित मांडल, शाहपुरा, आसींद, जहाजपुर, बीगोद, महुआ, बदनोर, कोटड़ी, बनेड़ा, गुलाबपुरा, गंगापुर, हुरड़ा आदि 25 स्थानों से कुल 574 सेविकाओं ने संचलन में सहभागिता की।


सामाजिक संगठनों और नागरिकों का उत्साहवर्धन

संचलन मार्ग में लघु उद्योग भारती, शिक्षक संघ, सक्षम, विद्या भारती, सहकार भारती, हिन्दू जागरण मंच, दुर्गा वाहिनी, विश्व हिंदू परिषद, दुर्गा शक्ति अखाड़ा, भारत विकास परिषद, वनवासी कल्याण परिषद जैसे संगठनों ने भारत माता के जयघोष और पुष्पवर्षा के साथ सेविकाओं का भव्य स्वागत किया।


समर्पण और संदेश

कार्यक्रम ने शक्ति, संगठन और राष्ट्रभक्ति का संगम प्रस्तुत किया। नन्ही बालिकाओं से लेकर वरिष्ठ सेविकाओं तक की कदमताल ने विजयादशमी पर्व को समर्पित और सशक्त मातृशक्ति के स्वरूप को दर्शाया।

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