लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
“सीधी बात नो बकवास” में पूर्व डीजीपी डॉ. रवि प्रकाश मेहरा की बेबाक बातचीत
साक्षात्कारकर्ता: नीरज मेहरा, संपादक – लोक टुडे
“SC/ST समाज की असली लड़ाई क्या है? डॉ. मेहरा ने खोले कई बड़े राज | Exclusive Interview”
“35 साल की सेवा और अब यह मिशन! डॉ.
“दलित राष्ट्रपति क्यों? सिर्फ राष्ट्रपति कहो! डॉ. मेहरड़ा का बड़ा बयान | Exclusive Talk”
“ACB में नियुक्ति, इस्तीफा विवाद और अब चुनाव – डॉ. रवि प्रकाश मेहरड़ा ने तोड़ी चुप्पी”
जातियों में अंतर विवाह ही तोड़ेगा जातीय बंधन
जयपुर। 35 साल की अनुकरणीय सेवा, समाज सुधार की गहरी सोच और अनुसूचित जाति वर्ग के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता… इन्हीं मुद्दों को लेकर राजस्थान के पूर्व पुलिस महानिदेशक और अंबेडकर वेलफेयर सोसाइटी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. रवि प्रकाश मेहरा हमारे विशेष कार्यक्रम “सीधी बात—नो बकवास” में शामिल हुए।
साक्षात्कार के दौरान उन्होंने जाति, समाज, नशा, अंतरजातीय विवाह, सरकारी योजनाओं और सोसाइटी के चुनाव को लेकर खुलकर बात की।
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प्रश्न 1:सेवानिवृत्ति के बाद फिर से अंबेडकर वेलफेयर सोसाइटी के चुनाव मैदान में आने की वजह क्या है?
डॉ. मेहरड़ा
“सेवानिवृत्ति के बाद समाज के प्रति जिम्मेदारी कम नहीं होती, बल्कि और बढ़ जाती है। मैंने 35 साल तक संविधान के दायरे में रहते हुए कमजोर, गरीब और पीड़ित वर्ग की सेवा की है। मुझे लगता है कि अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है, इसलिए मैं फिर से अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ रहा हूं।”

प्रश्न 2: आपने कहा कि लोगों को ‘दलित राष्ट्रपति’, ‘दलित मुख्यमंत्री’ जैसे संबोधन नहीं देना चाहिए… क्यों?
डॉ. मेहरड़ा:
“किसी जाति में पैदा होना किसी के हाथ में नहीं होता, वह एक्सीडेंटल है।
लेकिन कोई व्यक्ति जब किसी constitutional पद पर पहुंचता है तो वह अपनी योग्यता से पहुंचता है।
उसे जातिगत आधार पर संबोधित करना गलत परंपरा है।
पद पर बैठा व्यक्ति सिर्फ अपनी जाति का नहीं, पूरे राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करता है।”
प्रश्न 3: सामाजिक भेदभाव समाप्त कैसे होगा?
डॉ. मेहरड़ा:
“जब तक अंतरजातीय विवाह नहीं बढ़ेंगे, भेदभाव खत्म नहीं होगा।
सभी जातियों—SC, ST, OBC, सवर्ण—को आगे आकर इसे बढ़ावा देना चाहिए।
जैसे-जैसे अंतरजातीय विवाह बढ़ेंगे, जातिवादी सोच कमजोर पड़ेगी।”
प्रश्न 4: आपके अध्यक्ष पद से इस्तीफे को लेकर काफी विवाद हुआ था, आप क्या कहना चाहेंगे?
डॉ. मेहरड़ा
“जब मुझे ACB में डीआईजी बनाया जाना था, कुछ लोगों ने शिकायत की कि मैं एक जाति विशेष के संगठन से जुड़ा हूं।
सरकार ने कहा कि इससे गलत संदेश जाएगा।
इसलिए मैंने स्वयं अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया।
इसके बाद कार्यकारिणी ने अपने संवैधानिक अधिकार से तत्कालीन उपाध्यक्ष जसवंत कुमार को अध्यक्ष चुना।
मैं बैठक में था ही नहीं, न मैंने किसी पर दबाव डाला। यह सब संविधान अनुसार हुआ।”
प्रश्न 5: युवाओं में बढ़ रही नशाखोरी और सोशल मीडिया की लत को लेकर आपकी चिंता क्या है?
डॉ. मेहरड़ा
“नशा घर-घर में घुस रहा है और सोशल मीडिया भी नशे जैसा बन चुका है।
स्कूल-कॉलेज के स्तर से बच्चे इसकी चपेट में आ रहे हैं।
युवाओं को शिक्षित, संगठित और अनुशासित बनाना जरूरी है।
नशा और सोशल मीडिया की लत हटेगी तभी युवा और देश मजबूत बनेगा।”
