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सांगानेर की 87 कॉलोनियों में भय और संगठित संघर्ष, मुख्यमंत्री से न्याय की उम्मीद!

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर से रिपोर्ट ।लोक टुडे न्यूज़

सांगानेर में उम्मीद की किरण: अब संवाद से सुलझेगा संकट

जयपुर के सांगानेर क्षेत्र में 87 कॉलोनियों को लेकर जारी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लोगों में गहरी चिंता और बेचैनी का माहौल है। आदेश के बाद से ही स्थानीय निवासियों को यह डर सता रहा है कि कहीं उनके मकान तोड़े न जाएं। इसी भय से बचने के लिए अब कॉलोनीवासी संगठित हो रहे हैं और उन्होंने “सांगानेर सामूहिक संघर्ष समिति” का गठन कर लिया है। समिति का नारा है — “एक सबके लिए, सब एक के लिए” — ताकि किसी एक की आवाज सबकी बन सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे 30-40 वर्षों से यहां बसे हुए हैं और उन्होंने सोसाइटी से जमीन खरीदकर कानूनी रूप से घर बनाए हैं। ऐसे में उन्हें “अवैध” बताकर हटाना न्यायसंगत नहीं है। लोगों का आरोप है कि अदालत में कुछ अधिकारियों द्वारा गलत तथ्य प्रस्तुत किए गए हैं, जिनके कारण यह भ्रम की स्थिति बनी है। अब जनता चाहती है कि सरकार अदालत के सामने सही तथ्य रखे और कॉलोनीवासियों को भी अपना पक्ष रखने का अवसर दे। 
एक-एक जोड़कर घर बनाता है टूटने कैसे देगा
रहवासी हर सहाय यादव, केसर लाल, अर्जुन गुप्ता ,राधा गुप्ता, शांति शर्मा, राधेश्याम ,शिल्पा ,सुरेश , मदन लाल बैरवा ,हरिशंकर शर्मा ,पवन बेरवा, सतेंद्र शर्मा, राम सिंह राजावत ,कन्हैयालाल मीणा ,रामावतार बैरवा, दीपिका सिंह सहित अधिकांश लोगों का कहना है कि वह सालों से यहां रजिस्टर्ड मकान में घर बना कर रह रहे हैं ।  लेकिन जब से कोर्ट का आदेश आया है समाचार पत्रों में खबरें आ रही है उससे उनके डर का माहौल है।  आप भी बताइए कोई अपना खुद घर छोड़कर जाता है। एक आदमी को अपना घर बनाने में पूरी जिंदगी भर की कमाई लग जाती है।  वह एक-एक ईंट जोड़कर घर बनाता है।  कोई कर्ज लेकर बनाता है, तो कोई गहने बेचकर बनाता है ,तो कोई गांव की जमीन बेचकर घर बनाता है । बड़ी मुश्किल से वह अपने  रहने के लिए घर तैयार करता है और उस घर को भी यदि कोई तोड़ने की बात कहे तो, वह मर सकता है, घर नहीं तोड़ने देगा।  यहां के लोग भी अपने घरों को किसी भी कीमत पर नहीं टूटने देंगे, चाहे इसके लिए उन्हें अपनी चाह नहीं क्यों नहीं देने पड़े।

80 फ़ीसदी बन चुके हैं घर

इन कॉलोनियों में करीब 80 फ़ीसदी आबादी बस चुकी है, जिन्हें हटाना न तो संभव है और न मानवीय दृष्टि से उचित। कई परिवारों में बुजुर्ग, बीमार लोग और शादी योग्य बच्चे हैं, जिनके भविष्य पर संकट मंडरा रहा है। महिलाओं ने भावनात्मक अपील करते हुए कहा — “हमने सोसाइटी से जमीन खरीदकर घर बनाए, किसी सरकारी जमीन पर कब्जा नहीं किया, तो हमें क्यों उजाड़ा जा रहा है?”

मुख्यमंत्री ही बनेंगे तारणहार

स्थानीय नागरिकों का यह भी कहना है कि जब कभी जनता पर संकट आता है, तो उसका विधायक उसके साथ खड़ा होता है। “हमारा तो विधायक ही मुख्यमंत्री है,” लोगों ने कहा — “अब यह मुख्यमंत्री की लड़ाई है कि वे अपनी जनता को कैसे बचाते हैं।”
लोक टुडे न्यूज़ जनता की इस आवाज़ को सरकार और संबंधित प्रशासन तक पहुंचाने का सतत प्रयास कर रहा है, ताकि संवाद से समाधान निकल सके और किसी भी निर्दोष परिवार को उजाड़ने की नौबत न आए।

 

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