लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
सत्यनारायण सेन
भीलवाड़ा/राजसमंद। राजस्थान के राजसमंद और भीलवाड़ा जिले की सीमा पर स्थित रायपुर उपखंड के बाड़िया गांव में बाड़िया माता का प्रसिद्ध मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। माना जाता है कि यहां परिक्रमा करने से लकवा जैसी गंभीर बीमारियों से भी लोगों को राहत मिलती है। यही कारण है कि मंदिर में रोजाना सैकड़ों की संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं और नियमित सेवा-पूजा व आरती में भाग लेते हैं।
परिक्रमा से मिलता है रोगों से छुटकारा
स्थानीय श्रद्धालु ओमप्रकाश सेन (पालरा) बताते हैं कि अगर किसी महिला या पुरुष को लकवा जैसी बीमारी हो जाए, तो मंदिर में परिक्रमा लगाने से चमत्कारिक रूप से राहत मिलती है। कई पीड़ित यहां 10 से 30 दिन तक रुककर पूजा-अर्चना करते हैं और ठीक होकर घर लौटते हैं।
मंदिर तक पहुंच और सुविधाएं
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रायपुर से दूरी : 10 किमी
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कोशिथल से दूरी : 7 किमी
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नान्दसा जागीर से दूरी : 3 किमी
मंदिर तक आने-जाने के लिए बस और निजी वाहन की सुविधा उपलब्ध है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विभिन्न समाजों ने सराय और रसोई की व्यवस्था करवाई है। यहां रुकने और भोजन बनाने की सुविधा पूरी तरह निशुल्क है। विशेषकर शनिवार, रविवार और नवरात्रों में यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।
मंदिर का इतिहास
कहते हैं कि पहले इस गांव का नाम “कुम्हारों का वाडिया” था, लेकिन माता के चमत्कारों के चलते इसे बाड़िया माता कहा जाने लगा।
इतिहास के अनुसार, विक्रम संवत् 1985 में माता ने भक्त किशना जी गुर्जर (खटाणा) की पुत्री जम्बू को लकवा रोग से मुक्ति दिलाकर चमत्कार किया। इसके बाद सुदर्शन चक्र के रुकने वाली जगह पर देवी की स्थापना की गई।
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किशना जी ने 15 वर्ष तक नियमित सेवा पूजा की।
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उनके पुत्र जोधराज गुर्जर ने 1971 में मंदिर और मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करवाई।
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वर्तमान में उनके वंशज और भेरूलाल गुर्जर (भोपाजी) सेवा-पूजा कर रहे हैं।
विशेष आकर्षण
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मंदिर परिसर में जोधा भोपाजी की मूर्ति भी स्थापित है, जिन्हें माता ने दिव्य दर्शन दिए थे।
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मंदिर से लगभग 1 किमी दूर बाड़िया श्याम मंदिर भी लोकप्रिय धार्मिक स्थल है।
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नवरात्रों में यहां पैदल यात्रा कर आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।













































