“सूची जो रुकी रही… क्योंकि शाह आ रहे हैं” — बॉस के दौरे के दौरान कोई चूक नहीं हो जाए इसलिए उनके आने से पहले ये पुलिस महकमें में फेरबदल नहीं होगा। एक सियासी इंतज़ार की खामोश कहानी
हेमराज तिवारी
सरकार अपनी स्पीड में चल रही है, लेकिन सांसें थमी हैं। कागज़ तैयार हैं, पर कलम रुकी हुई है। क्यों? क्योंकि ‘दौरा’ है… केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का और दौरे में कुछ भी बदल सकता है।
भारतीय पुलिस सेवा की वो लंबे समय से प्रतीक्षित तबादला सूची — जो कभी “आज शाम”, तो कभी “रात 10 बजे” की अफ़वाहों में लटकी रही — एक बार फिर स्थगित हो गई,क्योंकि सरकार नहीं चाहती की अमित शाह के दौरे के दौरान किसी तरह की कोई प्रशासनिक चूक नहीं हो। 
और वजह?
जयपुर की हवाओं में अमित शाह की मौजूदगी…
केंद्रीय गृह मंत्री का यह दौरा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक ‘पॉज़’ का पर्याय बन गया है। राज्य के भीतर कहीं न कहीं एक अदृश्य ‘संकेत तंत्र’ है, जो यह तय करता है कि किसकी नियुक्ति हो, और किसका नाम कुछ दिनों और इंतजार करे।
आज मुख्यमंत्री के एसीएस शिखर अग्रवाल और डीजीपी राजीव शर्मा कार्यालय में डटे रहे। कई जानकारियों के पन्ने पलटे गए। कई फ़ाइलें चुपचाप खोली गईं। पर निर्णय — फिर भी टल गया। क्योंकि अब निर्णय सिर्फ़ प्रशासनिक नहीं — बल्कि राजनीतिक परिधि में नापा-तोला जाता है।
डीजीपी राजीव शर्मा के लिए यह सिर्फ़ तबादला सूची नहीं — एक मानचित्र है कानून व्यवस्था का। वे जिन नामों पर सोच रहे हैं, वे सिर्फ़ अधिकारी नहीं — आने वाले समय के जिम्मेदार चेहरे होंगे।
एसपी, डीआईजी, आईजी… हर एक नाम के साथ जुड़ी है एक ज़िम्मेदारी की लकीर, और शायद एक राजनीतिक रेखा भी। सूत्र फुसफुसा रहे हैं — “अगले सप्ताह किसी भी दिन यह जम्बो सूची जारी हो सकती है। पुलिस मुख्यालय में व्यापक फेरबदल होगा। सिर्फ आईपीएस नहीं — आईएएस की भी एक नई सुबह लिखी जाएगी।”
लेकिन तब तक… हर अफसर, हर पत्रकार, हर राजनीतिक पंडित — अपनी-अपनी सूची मन में बनाकर इस ‘यात्रा’ के समापन का इंतजार कर रहा है।क्योंकि जब अमित शाह की गाड़ी लौटेगी, तभी शायद कलम चलेगी।
“सूचियाँ केवल नाम नहीं होतीं… वे सत्ता के तापमान को नापने वाला थर्मामीटर होती हैं। और फिलहाल, थर्मामीटर शाह के पास है।”
जयपुर को मिलेगा नया कमिश्नर
लंबे समय से जयपुर कमिश्नरेट संभाल रहे बीजू जॅार्ज जोसेफ का जाना लगभग तय हो गया। उनके स्थान पर जल्द ही दमदार आईपीएस अधिकारी कमान संभालेगा। ऐसा नहीं है की बीजू जॅार्ज जोसेफ यहां कमजोर साबित हो रहे है इसके पीछे उनका इस सीट पर लंबे समय से काबिज रहना है। लंबा समय क्या पूर्ववर्ती गहलोत सरकार के समय से बीजू जॅार्ज जोसेफ के पास जयपुर की कमान है । इसलिए जयपुर शहर को नया कमिश्नर मिलना तय है।





















































