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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
22 नवंबर को कैंडल मार्च और विरोध प्रदर्शन
स्थान: जयपुर
मांग: “अमायरा को न्या दो”
जयपुर के प्रतिष्ठित नीरजा मोदी स्कूल को 9 साल की छात्रा अमायरा की संदिग्ध मौत के मामले में CBSE की जांच में दोषी पाया गया है। बोर्ड ने शो-कॉज नोटिस जारी कर पूछा है—
“क्यों न स्कूल की एफिलिएशन रद्द कर दी जाए?”
जांच में सामने आए बड़े तथ्य:
• अमायरा ने लगभग 18 महीने तक बुलिंग की शिकायतें कीं, पर स्कूल ने गंभीरता नहीं दिखाई
• हादसे से पहले 45 मिनट में 5 बार टीचर से मदद मांगी, प्रतिक्रिया मिली— “क्लास में बैठो”
• सुरक्षा-व्यवस्था बेहद कमजोर, छात्रा ग्राउंड फ्लोर से चौथी मंजिल तक बेधड़क पहुंच गई
• घटनास्थल को फोरेंसिक से पहले साफ कराया गया, सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका
• CCTV कैमरे बिना ऑडियो, लाइव मॉनिटरिंग व्यवस्था शून्य
• एंटी-बुलिंग और POCSO गाइडलाइंस का उल्लंघन
कार्रवाई का रास्ता क्या?
CBSE ने इन दंडों का उल्लेख किया है:
चेतावनी
भारी फाइन
एफिलिएशन डाउनग्रेड
सस्पेंशन
एफिलिएशन समाप्ति
सबसे बड़ा सवाल — पुलिस को “कुछ नहीं मिला” क्यों?
जहां CBSE ने गंभीर चूक पाई
वहीं 21 दिन की जांच कर रही राजस्थान पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं
क्योंकि फोरेंसिक से पहले घटनास्थल साफ होना खुद एक बड़ा संदेह है
अभिभावकों की मांग
सिर्फ रिपोर्ट नहीं — कार्रवाई चाहिए
जिम्मेदारों पर FIR, गिरफ्तारी और कानूनी सजा । POCSO के तहत कड़ी कार्रवाई
न्याय की लड़ाई जारी
अगर बुलिंग पर समय रहते सुनवाई होती,
सुरक्षा इंतज़ाम होते,
और जांच सही ढंग से होती,
तो शायद आज अमायरा हमारे बीच होती।
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