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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
नन्ही अमायरा सहित शिक्षा विभाग की अव्यवस्थाओं पर विरोध तेज
परिवर्तन संस्था के ‘शिक्षा मंत्री लापता’ पोस्टर अभियान को संयुक्त अभिभावक संघ का समर्थन**
जयपुर। नीरजा मोदी स्कूल में मासूम बच्ची अमायरा की दर्दनाक मौत और शिक्षा विभाग की लगातार बढ़ती अव्यवस्थाओं को लेकर संयुक्त अभिभावक संघ ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। संघ ने राज्य के शिक्षा विभाग, विशेषकर राजस्थान के शिक्षा मंत्री पर उदासीनता, निष्क्रियता और असंवेदनशीलता का गंभीर आरोप लगाया है।
संघ का कहना है कि पूरे प्रदेश में अभिभावक न्याय की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का लगातार मौन रहना बच्चों की सुरक्षा के प्रति विभाग की गैर-गंभीरता को उजागर करता है। घटना ने अभिभावकों में भय और असुरक्षा की स्थिति पैदा कर दी है, फिर भी विभाग का शीर्ष नेतृत्व इससे दूरी बनाए हुए है।
परिवर्तन संस्था के पोस्टर अभियान को मिला समर्थन
संयुक्त अभिभावक संघ ने परिवर्तन संस्था द्वारा चलाए जा रहे “Justice for Amaira” अभियान और शहरभर में लगाए गए “शिक्षा मंत्री लापता” पोस्टरों का समर्थन किया है। संघ का कहना है कि सामाजिक संगठनों और अभिभावकों की एकजुटता ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
संघ ने आरोप लगाया कि यह पोस्टर अभियान शिक्षा मंत्री की अनुपस्थिति, निष्क्रियता और संवेदनहीनता को सामने लाता है, जिसे अभिभावकों का व्यापक समर्थन मिलना चाहिए।
संयुक्त अभिभावक संघ द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप
शिक्षा मंत्री ने आज तक नीरजा मोदी स्कूल का दौरा नहीं किया।
अमायरा के परिजनों से किए गए वादे—कि शिक्षा विभाग सीबीएसई की तर्ज पर नोटिस जारी करेगा—आज तक पूरे नहीं हुए।
शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट न तो अभिभावकों को उपलब्ध कराई गई, न ही सार्वजनिक की गई।
घटना को 39 दिन बीत जाने के बाद भी किसी भी निजी स्कूल में सुरक्षा मानकों को लेकर कोई कठोर कार्रवाई नहीं की गई।
संघ का कहना है कि यह रवैया किसी भी जिम्मेदार मंत्री के लिए अत्यंत निराशाजनक और गैर-जिम्मेदाराना है।
प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू का बयान
संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा—
“अमायरा सहित पिछले 39 दिनों में प्रदेश के 5 से अधिक मासूम बच्चों की जान चली गई, लेकिन शिक्षा मंत्री आज भी मौन हैं। यह पूरे राजस्थान के अभिभावकों के साथ अन्याय है। यदि पीड़ित परिवारों और आवाज उठाने वालों से भी दूरी बनाई जाएगी, तो साफ है कि निजी स्कूलों की लापरवाही पर अंकुश लगाने की सरकार की इच्छाशक्ति ही नहीं है। न्याय मिलने तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा।”
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