Home latest अधिवक्ताओं का न्यायिक ढांचे पर आक्रोश, विशेष न्यायालयों की तत्काल स्थापना की...

अधिवक्ताओं का न्यायिक ढांचे पर आक्रोश, विशेष न्यायालयों की तत्काल स्थापना की मांग

0

लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

नागौर, (प्रदीप कुमार डागा): नागौर जिले में वर्षों से उपेक्षित न्यायिक ढांचे को लेकर अधिवक्ताओं का आक्रोश खुलकर सामने आया। जिला अधिवक्ता संघ के नेतृत्व में वरिष्ठ एवं युवा अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरुण कुमार बेरीवाल को विस्तृत ज्ञापन सौंपा और नागौर में विभिन्न विशेष न्यायालयों की तत्काल स्थापना की जोरदार मांग की।

प्रतिनिधिमंडल द्वारा उठाए गए मुख्य मुद्दे

  • अत्यधिक कार्यभार: NDPS अधिनियम के सैकड़ों गंभीर प्रकरण लंबित, समयबद्ध सुनवाई नहीं होने से अपराध नियंत्रण प्रक्रिया कमजोर।
  • वाणिज्यिक समस्याएं: Negotiable Instruments Act (चेक बाउंस) के हजारों मामलों की लंबित स्थिति से व्यापारिक व्यवस्था प्रभावित।
  • मोटर दुर्घटना दावे (MACT): मामलों में देरी से पीड़ितों और उनके आश्रितों को समय पर क्षतिपूर्ति नहीं मिल रही।
  • फैमिली कोर्ट का अभाव: वैवाहिक और पारिवारिक विवादों का संवेदनशील एवं समयबद्ध निस्तारण प्रभावित।
  • ग्रामीण न्याय की कठिनाई: SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के मामलों में मेड़ता तक लगभग 80 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है।
  • भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और कमर्शियल कोर्ट: अन्य स्थानों पर सुनवाई होने से न्याय प्राप्ति में अनावश्यक देरी और खर्च।

प्रतिनिधिमंडल का निष्कर्ष

अधिवक्ताओं ने कहा कि नागौर जैसे विशाल भौगोलिक क्षेत्र और लगातार बढ़ते मुकदमों की संख्या के बावजूद न्यायालयों का पर्याप्त विस्तार नहीं होना न्याय व्यवस्था के प्रति उदासीनता को दर्शाता है। उन्होंने चेताया कि समय रहते सुधार न होने पर आमजन का न्याय व्यवस्था पर विश्वास कमजोर होगा।

न्यायाधीश की प्रतिक्रिया

जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरुण कुमार बेरीवाल ने प्रतिनिधिमंडल के साथ चर्चा करते हुए नागौर में विशेष न्यायालयों की आवश्यकता स्वीकार की और उच्च स्तर पर अनुशंसा करने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर सीजेएम सुमन सहारण और अधिवक्तागण डॉ. पवन श्रीमाली, प्रेमसुख फ़िडोदा, कालूराम सांखला, महावीर विश्नोई, सहदेव चौधरी, निंबाराम काला, हरीप्रसाद सांचोरा, नथूराम मेघवाल, अविनाश जोशी सहित अन्य मौजूद थे।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version