लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
उनियारा (दुर्योधन मयंक)। उपखंड क्षेत्र के सुथड़ा स्थित श्री दिगम्बर जैन सुखोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र में जन-जन के आराध्य आचार्य विद्यासागर महाराज का द्वितीय समाधि दिवस श्रद्धा एवं भक्ति भाव से मनाया गया।
प्रबंध कमेटी अध्यक्ष महावीर प्रसाद पराणा एवं गजानन्द जैन ने बताया कि आचार्य विद्यासागर जी दिगंबर जैन धर्म के प्रभावशाली संत, प्रखर तपस्वी और ‘संत शिरोमणि’ के रूप में विख्यात थे। उन्होंने मूक माटी महाकाव्य सहित अनेक साहित्यिक कृतियों की रचना की तथा देशभर में शैक्षिक व धार्मिक सुधारों के लिए प्रेरक भूमिका निभाई। उनका जन्म कर्नाटक के चिक्कोड़ी में हुआ था और 18 फरवरी 2024 को छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में वे समाधिस्थ हुए।
इस अवसर पर शास्त्री प्रिंस जैन व देवांश के निर्देशन में मंगलाष्टक के साथ नित्य अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। तीर्थरक्षक शांतिधारा तेजमल, घासीलाल, संतू कुमार, राजेश कुमार खूंट (उनियारा), वार्षिक शांतिधारा रमेशचंद, रौनक सर्राफ (जयपुर), पांडुशिला शांतिधारा नरेंद्र कुमार (बनेठा), भागचंद (द्वितीय) एवं जयकुमार (ककोड़) द्वारा की गई।
इसके पश्चात देव-शास्त्र पूजा, चौबीस भगवानों की मूलनायक पूजा एवं आचार्य विद्यासागर जी महाराज की विशेष पूजा कर समाधि दिवस मनाया गया।
भक्तामर संयोजक हुकुमचंद (शहर वाले) एवं बसंत जैन (बनेठा) ने बताया कि सायं 6 बजे श्रेष्ठी परिवार एवं बुधवार भक्तामर मंडल बनेठा के तत्वावधान में भक्तामर दीपार्चना सानंद संपन्न हुई।


















































