लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
ध्रुव राठी जाट या मुस्लिम
जयपुर। सोशल मीडिया के दौर में कुछ चेहरे ऐसे हैं, जिन्होंने पारंपरिक मीडिया के बाहर अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाई है। इनमें ध्रुव राठी सबसे चर्चित नामों में शामिल हैं। कोई उन्हें डिजिटल एजुकेटर और फैक्ट-आधारित कंटेंट क्रिएटर मानता है तो आलोचक उन्हें सरकार और खासतौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा भाजपा के खिलाफ मुखर राजनीतिक टिप्पणीकार मानते हैं। उनकी लोकप्रियता जितनी बड़ी है, विवाद भी उतने ही लगातार उनके साथ जुड़े रहे हैं।
लेकिन ध्रुव राठी आखिर हैं कौन? हरियाणा के किस शहर से उनका संबंध है, उनकी पढ़ाई कहां हुई, परिवार कौन है, जर्मनी में रहने के बावजूद उनकी भारतीय नागरिकता को लेकर सवाल क्यों उठते रहे और हाल में पासपोर्ट दिखाने की जरूरत क्यों पड़ी—इन सवालों के जवाब उनकी पूरी कहानी को समझने में मदद करते हैं।
रोहतक में जन्म, हरियाणवी जाट परिवार से संबंध
ध्रुव राठी का जन्म 8 अक्टूबर 1994 को रोहतक, हरियाणा में हुआ। अपनी वेबसाइट पर राठी ने स्वयं लिखा है कि उनका जन्म एक हिंदू जाट परिवार में हुआ और हरियाणा में उनका पालन-पोषण हुआ। उन्होंने अपने माता-पिता के नाम महावीर राठी और उर्मिला राठी बताए हैं।
हालांकि उनके माता-पिता की पेशेवर पृष्ठभूमि को लेकर इंटरनेट पर अलग-अलग दावे मिलते हैं। पिता के इंजीनियर और मां के शिक्षक होने की जानकारी मिलती। दादा- और परिवार के अन्य सदस्य अभी भी हरियाणा में खेती- किसानी से जुड़े हैं।
ध्रुव का परिवार हरियाणा से जुड़ा है और अक्टूबर 2026 में भारत आने के दौरान उनके गुरुग्राम स्थित आवास का भी उल्लेख हुआ। हालिया रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस की कार्रवाई के समय वे अपने माता-पिता के साथ गुरुग्राम में रह रहे थे।
इंजीनियरिंग से शुरू हुई पढ़ाई, फिर राजनीति और अर्थशास्त्र की ओर रुझान
ध्रुव राठी की शैक्षणिक यात्रा भी उनके वर्तमान कंटेंट को समझने का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उनकी आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और इसके बाद जर्मनी के Karlsruhe Institute of Technology (KIT) से Renewable Energy में मास्टर डिग्री की। इसके अलावा उन्होंने Economics और Political Science में दूसरी बैचलर डिग्री भी की।
यानी उनकी शिक्षा केवल इंजीनियरिंग तक सीमित नहीं रही। तकनीकी शिक्षा के साथ ऊर्जा, अर्थशास्त्र और राजनीति जैसे विषयों में उनकी रुचि और अध्ययन आगे चलकर उनके डिजिटल कंटेंट का आधार बने।
प्रोफेसर हैं या यूट्यूबर?
ध्रुव राठी को लेकर सोशल मी डिया पर कई बार उन्हें “प्रोफेसर” कह दिया जाता है। लेकिन उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर उन्हें विश्वविद्यालय के नियमित प्रोफेसर के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।
वे स्वयं अपनी वेबसाइट पर कहते हैं कि उनकी पृष्ठभूमि मैकेनिकल और रिन्यूएबल एनर्जी इंजीनियरिंग में है, लेकिन उनकी रुचि Teaching और Filming में है। उन्होंने इसी रुचि को आगे बढ़ाते हुए ऑनलाइन शिक्षा और डिजिटल कंटेंट का रास्ता अपनाया।
उनका काम केवल राजनीतिक वीडियो तक सीमित नहीं है। वे—
राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर एक्सप्लेनर वीडियो बनाते हैं।
फैक्ट-चेकिंग और करंट अफेयर्स पर कंटेंट तैयार करते हैं।
यात्रा संबंधी वीडियो बनाते हैं।
अलग-अलग विषयों पर शैक्षिक कंटेंट तैयार करते हैं।
Dhruv Rathee Vlogs जैसे चैनलों के जरिए ट्रैवल कंटेंट करते हैं।
ऑनलाइन एजुकेशन से जुड़ी Dhruv Rathee Academy भी चलाते हैं।
वे 2014 के आसपास ट्रैवल वीडियो से YouTube की शुरुआत करने के बाद धीरे-धीरे सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों की तरफ बढ़े। 2016 के बाद उनका राजनीतिक कंटेंट अधिक प्रमुख हो गया।
शादी जर्मन नागरिक से, लेकिन नागरिकता भारतीय
ध्रुव राठी की पत्नी जुली एल्ब्र-राठी (Juli Lbr-Rathee) जर्मन नागरिक हैं। दोनों ने नवंबर 2021 में ऑस्ट्रिया के विएना स्थित Belvedere Palace में शादी की थी।
यही निजी जीवन भी बाद में उनकी नागरिकता को लेकर चलने वाली चर्चाओं का एक कारण बना। जर्मनी में लंबे समय तक रहना, जर्मन नागरिक से शादी और वहां काम करना—इन सबको सोशल मीडिया पर कई लोगों ने उनकी नागरिकता से जोड़ दिया।
लेकिन किसी दूसरे देश में रहना या वहां के नागरिक से विवाह करना अपने-आप भारतीय नागरिकता समाप्त नहीं करता।
सबसे बड़ा सवाल—ध्रुव राठी भारतीय हैं या जर्मन?
यह सवाल अक्टूबर 2026 में एक बार फिर जोरदार तरीके से उठा।
ध्रुव राठी जर्मनी में रहते हैं और वहीं से अपना डिजिटल काम करते हैं। इसी वजह से सोशल मीडिया पर लंबे समय से यह दावा किया जाता रहा कि उन्होंने भारतीय नागरिकता छोड़कर जर्मन नागरिकता ले ली है।
लेकिन 11 अक्टूबर 2026 को ध्रुव राठी ने खुद अपना भारतीय पासपोर्ट कैमरे के सामने दिखाकर कहा कि वे भारतीय नागरिक हैं और भारतीय नागरिक बने रहेंगे। इस घटनाक्रम की Times of India और The Week सहित कई मीडिया रिपोर्टों ने पुष्टि की है।
इसलिए उपलब्ध ताजा सार्वजनिक प्रमाण के आधार पर उन्हें भारतीय नागरिक बताना उचित है।
यहां एक महत्वपूर्ण फर्क समझना जरूरी है—जर्मनी में रहना और जर्मन नागरिक होना दो अलग बातें हैं। इसी तरह जर्मन नागरिक से शादी होना भी अपने आप किसी व्यक्ति को जर्मन नागरिक नहीं बना देता।
फिर नागरिकता पर इतना विवाद क्यों?
नागरिकता का विवाद उस समय और बढ़ा जब ध्रुव राठी अक्टूबर 2026 में भारत लौटे और राजनीतिक प्रदर्शन में शामिल होने की घोषणा की।
भाजपा नेता भास्कर राव ने उनके नागरिकता, इमिग्रेशन स्टेटस और भारत में प्रदर्शन करने के अधिकार को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय से जांच की मांग की थी। लेकिन ऐसी मांग अपने-आप में यह प्रमाण नहीं है कि राठी विदेशी नागरिक हैं।
इसके बाद राठी ने अपना पासपोर्ट सार्वजनिक करके इस सवाल का जवाब देने की कोशिश की।
यानी इस पूरे विवाद में दो चीजों को अलग-अलग रखना जरूरी है—एक तरफ उनकी जर्मनी में रहने की स्थिति है और दूसरी तरफ भारतीय नागरिकता। उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी में दोनों को एक ही चीज मानना सही नहीं है।
जाट या मुसलमान
ध्रुव राठी के विरोधी उन्हें कई बार सोशल मीडिया पर मुस्लिम बताकर ट्रोल करते हैं। कई बार उन पर मुस्लिम बताकर निशाना साधा जाता है। हाल ही में जब उन्हें पुलिस हिरासत में लिया गया तो उनके फोटो के साथ उनका सरनेम मुस्लिम लिखकर उन्हें मुस्लिम बताने की कोशिश की गई। जबकि खुद ध्रुव राठी ने लिखा है कि उनका परिवार हिंदू धर्म की जाट समाज में हुआ है और उन्हें अपने भारतीय और जाट होने पर गर्व है। यही नहीं जब ध्रुव राठी को ट्रोल किया जाता है जाट समाज ने खुलकर उनका समर्थन किया। किसान नेता राकेश टिकैत और हरियाणा के जाट समाज के नेताओं ने ध्रुव राठी को मारने की धमकी देने पर लठठ बजाने की बात कही।
विवादों में क्यों रहते हैं ध्रुव राठी?
ध्रुव राठी की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण ही उनके विवादों का सबसे बड़ा कारण भी है—उनका राजनीतिक कंटेंट।
वे केंद्र सरकार, भाजपा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चुनावी व्यवस्था, मीडिया, लोकतंत्र, बेरोजगारी, सामाजिक नीतियों और विभिन्न राजनीतिक घटनाक्रमों पर खुलकर टिप्पणी करते हैं।
उनके समर्थकों का तर्क है कि वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा में समझाते हैं और सत्ता से सवाल पूछना लोकतंत्र का हिस्सा है।
दूसरी ओर उनके आलोचक आरोप लगाते हैं कि उनके वीडियो में राजनीतिक पक्षधरता दिखाई देती है और कई विषयों को एक विशेष राजनीतिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया जाता है।
इसी कारण उन्हें लेकर बहस सिर्फ “YouTuber बनाम आलोचक” की नहीं रह गई है, बल्कि डिजिटल मीडिया की राजनीतिक भूमिका का बड़ा उदाहरण बन चुकी है।
2018 से चल रहा मानहानि विवाद भी फिर चर्चा में
अक्टूबर 2026 में दिल्ली की एक अदालत ने राठी को 2018 में दर्ज एक आपराधिक मानहानि मामले में नया समन जारी किया। मामला उनके पुराने BJP IT Cell से संबंधित वीडियो से जुड़ा है और शिकायतकर्ता विकास सांकृत्यायन हैं।
यह मामला नया नहीं है, लेकिन राठी के भारत आने के बाद इसकी कानूनी प्रक्रिया फिर चर्चा में आ गई।
यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी व्यक्ति पर मामला दर्ज होना या समन जारी होना दोष सिद्ध होना नहीं है। अंतिम फैसला अदालत की प्रक्रिया से ही होगा।
धार्मिक कंटेंट को लेकर नया विवाद
2026 में राठी के एक वीडियो को लेकर धार्मिक भावनाओं और कथित मानहानि से जुड़ा विवाद भी सामने आया। शिकायत में भगवान राम और सीता से संबंधित उनकी टिप्पणियों को लेकर आपत्ति जताई गई। दिल्ली पुलिस ने मामले की जांच में YouTube/Google से संबंधित जानकारी मांगी और दिल्ली हाईकोर्ट की कार्यवाही के बाद वीडियो की भारत में उपलब्धता पर भी कार्रवाई हुई।
अक्टूबर 2026 में इसी विवाद से जुड़े नए कानूनी मामले भी सामने आए।
इससे यह साफ होता है कि राठी का कंटेंट अब केवल राजनीतिक विवाद तक सीमित नहीं है—धर्म, इतिहास और सामाजिक मुद्दों पर उनकी व्याख्याएं भी बड़े विवाद का कारण बनती हैं।
2026 में फिर सुर्खियों में क्यों आए?
अक्टूबर 2026 में ध्रुव राठी भारत लौटे और चुनाव आयोग तथा कथित “वोट चोरी” के मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन से जुड़े।
10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले उन्हें गुरुग्राम स्थित आवास से पुलिस ने हिरासत में लिया। राठी ने बाद में दावा किया कि उन्हें “हिरासत” में नहीं बल्कि जबरन ले जाया गया। दूसरी ओर पुलिस की कार्रवाई को लेकर अलग-अलग रिपोर्टिंग सामने आई। इसलिए उनके “अपहरण” वाले दावे को उनके बयान के रूप में ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए, स्थापित न्यायिक तथ्य के रूप में नहीं।
रिहाई के बाद उन्होंने फिर सरकार और चुनावी व्यवस्था पर हमला बोला और अपनी भारतीय नागरिकता को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी प्रतिक्रिया दी।
ध्रुव राठी की कहानी का असली “ट्विस्ट”
ध्रुव राठी की कहानी को सिर्फ “जर्मनी में रहने वाले YouTuber” के रूप में देखना अधूरा होगा।
एक तरफ वे हरियाणा के रोहतक में जन्मे भारतीय हैं, जाट परिवार से आते हैं और भारतीय पासपोर्ट होने की बात सार्वजनिक रूप से दिखा चुके हैं। दूसरी तरफ उनका पेशेवर और वैवाहिक जीवन जर्मनी से गहराई से जुड़ा है।
इंजीनियरिंग की पढ़ाई से शुरुआत करने वाला यह युवक आज राजनीति, समाज, पर्यावरण, इतिहास और करंट अफेयर्स पर करोड़ों लोगों तक पहुंचने वाला डिजिटल क्रिएटर बन चुका है।
उनका प्रभाव पारंपरिक राजनीतिक पद से नहीं, बल्कि YouTube और सोशल मीडिया की पहुंच से आता है।
यही उनकी ताकत है और यही उनके विरोधियों की सबसे बड़ी आपत्ति भ
: ध्रुव राठी—डिजिटल पत्रकार, एक्टिविस्ट या राजनीतिक कमेंटेटर?
ध्रुव राठी को एक ही खांचे में रखना मुश्किल है।
वे स्वयं अपने काम को शिक्षा, फिल्मिंग और एक्सप्लेनर कंटेंट से जोड़ते हैं। सार्वजनिक रूप से उनकी पहचान YouTuber, डिजिटल क्रिएटर और सामाजिक-राजनीतिक टिप्पणीकार के रूप में है। उनकी शिक्षा इंजीनियरिंग, रिन्यूएबल एनर्जी, अर्थशास्त्र और राजनीतिक विज्ञान तक फैली है।
वे किसी चुनावी पार्टी के निर्वाचित नेता नहीं हैं, लेकिन उनके वीडियो का राजनीतिक प्रभाव जरूर है।
उनके समर्थक उन्हें सरकार से सवाल पूछने वाला डिजिटल एजुकेटर मानते हैं, जबकि आलोचक उन्हें एकतरफा राजनीतिक नैरेटिव चलाने वाला प्रभावशाली YouTuber बताते हैं।
सच्चाई शायद यही है कि ध्रुव राठी आज उस नए डिजिटल राजनीतिक युग का प्रतिनिधित्व करते हैं, जहां एक कैमरा, एक YouTube चैनल और करोड़ों दर्शक किसी व्यक्ति को पारंपरिक मीडिया संस्थानों के बराबर सार्वजनिक प्रभाव दे सकते हैं।
और यही वजह है कि ध्रुव राठी सिर्फ एक YouTuber नहीं रहे—वे भारतीय राजनीति और डिजिटल मीडिया के बीच चल रही बहस का खुद एक बड़ा विषय बन चुके हैं।
