
लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
जयपुर। जयपुर के भांकरोटा थाने में गुरुवार को पुलिस चौकी में सुसाइड करने वाले हेड कांस्टेबल बाबूलाल बैरवा का शव आज दूसरे दिन भी परिजनों ने नहीं उठाया है । बाबूलाल बैरवा के बेटे समेत सैकड़ो की संख्या में लोग कल से एसएमएस अस्पताल के मुर्दाघर के बाहर धरने पर बैठे हैं। लेकिन अभी तक प्रशासन की तरफ से किसी भी तरह की वार्ता की पहल नहीं की गई है जिससे लोगों में लगातार नाराजगी बढ़ रही है।
यह है प्रमुख मांगे
हेड कांस्टेबल बाबूलाल बैरवा की परिजन और दर्जनों सामाजिक संगठनों की ओर से सुसाइड नोट में जिन अधिकारियों के नाम लिखे हुए हैं। एडिशनल एसपी जगदीश व्यासं, एसीपी अनिल शर्मा, सब इंस्पेक्टर आशुतोष सिंह और पत्रकार कमल देगड़ा को गिरफ्तार करने की मांग है। इसके साथ इन चारों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने, मृतक के परिजनों को 2 करोड रुपए का नगद मुआवजा देने और मां और बेटे को नौकरी देने की मांग की जा रही है। पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की ।लेकिन अभी तक भी सरकार की तरफ से किसी तरह का कोई प्रतिनिधि मौके पर नहीं पहुंचा है ।इससे बार-बार समाज सहित तमाम दलित वर्ग के संगठनों में भारी नाराजगी बढ़ रही है।

थाने में अपराधी के सुसाइड करने पर होता है थाना बर्खास्त
धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि जब किसी थाने में कोई आरोपी या अपराधी भी सुसाइड कर लेता है तो सरकार ने आज से पहले पूरे के पूरे थाने को बर्खास्त किया है ।अब जब एक हेड कांस्टेबल थाना परिसर में बनी क्वार्टर में सुसाइड नोट लिखकर सुसाइड करता है । उसे अपने साथी पुलिस वालों के ग्रुप में शेयर करता है और सबसे बड़ी बात है कि सुसाइड करने से पहले मृतक ने मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार, भजनलाल शर्मा के नाम ही सुसाइड नोट लिखा है। जिसमें पुलिस अधिकारियों के नाम लिखे है ।एडिशनल एसपी जगदीश व्यास ,एसीपी अनिल शर्मा ,सब इंस्पेक्टर आशुतोष सिंह और पत्रकार कमल देगड़ा पर प्रताड़ित करने, गाली ,गलोच करने, ब्लैकमेल करने और जाति सूचक आधार पर प्रसारित करने और गलत काम करने का दबाव बनाना का आरोप लगाया है । कोई व्यक्ति इतना आसानी से कभी भी नहीं मरता है। जब तक कि वह बहुत ज्यादा परेशान नहीं होता है । धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि जब किसी थाने या पुलिस चौकी में अपराधी के सुसाइड करने पर पूरा थाने का था एपीओ किया जा सकता है तो फिर आखिरकार यहां पर सरकार को ताई क्यों बढ़ रही है क्यों नहीं नामजद आरोपियों को बर्खास्त किया जा रहा क्यों नहीं उनके खिलाफ हत्या का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा रहा है क्यों नहीं सरकार की तरफ से मुआवजे की और सरकारी नौकरी की घोषणा की जा रही है क्यों नहीं पीड़ित परिवार की शुद्ध लेने के लिए वहां कोई क्यों नहीं आ रहा है। यह तमाम वह मांगे हैं जो सरकार ने पहले से ही कई सालों से नियमों में बना रखी है कि जब भी कोई सरकारी कार्मिक इस तरह से सुसाइड कर लेता है प्रताड़ित होकर तो जिन लोगों के नाम सुसाइड नोट में होते हैं उनके खिलाफ तुरंत एक्शन होता है इसमें सरकार को इतना क्यों सोचना पड़ रहा है क्योंकि यह एक दलित व्यक्ति की मौत का मामला है।
डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा के खिलाफ भी लोगों में रोष
मृतक हेड कांस्टेबल बोबास गांव का रहने वाला था यह इलाका डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा का विधानसभा क्षेत्र है । प्रेमचंद बैरवा को दलित समाज को साधने के लिए ही बीजेपी ने राजस्थान सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाया है है मृतक भी बेरवा समाज से ही आता है ऐसे में धरने पर बैठे सैकड़ो लोगों ने मांग की है कि क्यों नहीं डिप्टी सीएम इस मामले में पहल करते जब दो दिन पहले ही एक व्यक्ति की झगड़े में मौत हो जाती है और वहां पर उसकी समाज के दो-दो विधायक मौके पर पहुंचकर सरकार की ओर से उसकी मौके पर ही परिवार को सहायता राशि उपलब्ध करा सकते हैं तो डिप्टी सीएम क्षेत्रीय विधायक होने के नाते और समाज का प्रतिनिधि होने के नाते भी मुख्यमंत्री से बात करके इस मामले का निपटारा करने में क्यों संकोच कर रहे हैं यह समझ से पड़े हैं लोगों ने कहा कि यदि उपमुख्यमंत्री ने इसमें किसी तरह की पहल नहीं की तो आने वाले समय में उनका नुकसान उठाना पड़ सकता है कहां तो सरकार डॉक्टर प्रेमचंद बैरवा के नाम से आने वाले समय में दलित समाज को साधने का काम कर रही है, उनको इस घटनाक्रम से नुकसान होने वाला है ।,लोगों का कहना है कि प्रेमचंद बैरवा को चाहिए कि वह मुख्यमंत्री जी से बातचीत करें और क्योंकि पूर्व में भी इस तरह के मुआवजे सरकारी नौकरियों और आरोपियों के खिलाफ एक्शन होते रहे हैं तो मुख्यमंत्री जी का लिखित में आदेश और संदेश लेकर प्रेरित धरना स्थल पर पहुंचकर इसकी घोषणा करें करें तो उनकी भी साख बच सकती है और सरकार का भी दलित वर्ग में भरोसा बढ़ेगा। डॉक्टर प्रेमचंद बेरवा की साख बन सकेगी वरना तो लोगों में उनके खिलाफ लगातार आक्रोश बढ़ रहा है जिसका खामियाजा उन्हें भी भुगतना पड़ सकता है।

पुलिस पर लगाया दबाव बनाने का आरोप
धरने पर मौजूद लोगों का आरोप है की पुलिस लगातार पिछले दिन से ही धरना समाप्त करने के लिए दबाव बना रही है। लेकिन अभी तक पुलिस के यहां मौजूद किसी भी अधिकारी ने सरकार की तरफ से पीड़ित परिवार को क्या मिलेगा इसकी घोषणा नहीं की है। नहीं कोई लिखित में अभी तक कोई यहां लेकर आया है और पुलिस लगातार धरने को उठाने के लिए दबाव बना रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अभी हम लोग शांतिपूर्ण तरीके से धरने पर बैठे हैं। यदि प्रताड़ित किया गया और न्याय नहीं मिला तो यह आंदोलन उग्र होगा और सरकार को भी इसका खामियाजा भुगतना होगा।

















































