
जमवारामगढ l राकेश शर्मा रिपोर्टर आंधी तहसील के गांव सरजोली में बकरियों में फैली बीमारी से पशुधन असमय काल का ग्रास बन रह है। विगत दस दिनों करीब 30 से अधिक बकरियों की मौत हो चुकी है, और 60 से ज्यादा घायल हो चुकी है। जिससे पशुपालक चिंतित नजर आ रहे है। ग्रामीण मंगल चंद मीणा, पशुपालक रमेश और हनुमान गुर्जर के अनुसार भेड़ बकरियों में अज्ञात बीमारी फैली हुई है, जिसके कारण पशुओं की अकाल मौत हो रही है। पिछले दिनों से जांच नहीं होने के कारण बीमारी का पता नहीं चल पा रहा है। उन्होंने बताया कि एक सप्ताह में गांव में कई जगह पर करीब तीस से अधिक बकरियों की मौत हो चुकी है, वहीं छः दर्जन से अधिक बकरीया बीमार है। सरजोली गांव में पिछले दस दिनों में हनुमान गुर्जर 8, रमेश गुर्जर 10, हरफूल योगी 10, शंकर मोर्य 15, अनोखी बलाई 8, बंशीधर मोर्य 6, मुकेश योगी 2, सरवन 5, सहित अन्य पशुपालको की बकरियों की मौत हो गई है। सूचना पर बुधवार को सुबह मोबाईल यूनिट मेडिकल टीम सरजोली पहुंची। मोबाइल यूनिट मेडिकल टीम से डॉ रेणुका ने बताया कि बरसात के मौसम में नई ज़हरीली घास खाने से बकरियों की मौत हुई है। जिन बकरियों का इम्यूनिटी सिस्टम अच्छा होता है। उनके कोई इफेक्ट नहीं होता है। तथा बच्चे और कमज़ोर बकरियां घास खाने से मर जाती है। मेडिकल टीम ने गांव में पशुपालकों के घर_घर जाकर करीब 60 से अधिक बकरियों इलाज कर दिया है। मेडिकल टीम से डॉ रेणुका मीना, लेखराज (मोबाईल यूनिट), राधेश्याम शर्मा पशु चिकित्सा उपकेंद्र नेवर, विजय मीना पशु चिकित्सा उपकेंद्र गांवली, विष्णु मीणा पशु चिकित्सा केंद्र चावंडिया मौजूद रहें।

बीमारी के आगे पशु पालक बेबस
ग्राम पंचायत नेवर के सरजोली सहित उसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को इन दोनों परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र के अधिकांश पशुपालक बकरी पालन से परिवार का पालन पोषण करते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि गत कुछ दिनों से बाड़े व चरते समय बकरियों में अज्ञात बीमारी लग जाने से वह तड़पने लगती है और उनकी मौत हो जाती है। अब तक से तीन दर्जन से अधिक भेड़ों की मौत हो जाने की सूचना है, वहीं 60 से अधिक बकरियां चपेट में आने से गंभीर रूप से बीमार चल रही है। इसको लेकर इस क्षेत्र के पशुपालक परेशान नजर आ रहे हैं।

श्वांस लेने में तकलीफ, गले में सूजन
मोबाईल यूनिट मेडिकल टीम की डॉ रेणुका मीना ने बताया कि जहरीली घास खाने से पशुओं में पहले श्वांस लेने में तकलीफ होती है। रुक-रुककर सांस आने, हांफ जाने, गले में सूजन से बकरी की मौत हो जाती है।
इनका कहना है
बरसात के दिनों में पहाड़ी इलाकों में ज़हरीली घास उग आती है। बकरियां घास खा गई और पानी नही पी, जिसके कारण मौत हुई है। बीस_तीस बकरियो की मौत हो चुकी है और कई





















































