शत प्रतिशत पौधे लगाना कोई 85 वर्षीय खाना लाल धाकड़ से सीखे

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हजारों पौधे दे रहे है फल और छाया,हो रहा है पर्यावरण स्वछ

मांडलगढ़। (केसरीमल मेवाड़ा वरिष्ठ संवाददाता ) आजकल पेड़- पौधे लगाने का ट्रेंड जोरदार चल रहा है नेता हो या अधिकारी -कर्मचारी या कोई संस्था हर कोई पौधे लगाने की जहमत में अपनी ओर से जी जान लगा देते है और बढ़िया सी फोटो खींचवाकर सोशल मीडिया के लिए फ़ोटो अवश्य सहेजते है। जब इन लोगों द्वारा पौधे लगाए जाते है हर प्रकार के संसाधन इनके उपलब्ध रहते है ताकि जब पौधारोपण किया जा रहा हो इन लोगो को कोई परेशानी का सामना नही करना पड़े। इन लोगो द्वारा लगाए गए पौधे जब तक उनमें सांस मोजुद रहती है वे जीने के लिए संघर्ष करते है ओर अंत मे दम तोड़ देते है जबकि कुछ पौधों में जो संघर्ष में जीत जाता है उसमें कलियां खिल जाती है । लेकिन बाकी पौधे शहादत प्राप्त कर लेते है और उन लोगो को अक्सर कोसते होंगे जिन्होंने उन्हें इस अवस्था-दशा में छोड़ा। हम किसी पर आरोप प्रत्यारोप नही लगा रहे है वर्तमान समय मे पौधारोपण पर चल रहे ट्रेंड पर फोकस कर रहे है जो किसी भी हालत में शोभा नही देता है।

लेकिन इसके ठीक विपरीत मांडलगढ़ के एक वयोवृद्ध व्यक्ति खाना लाल धाकड़ जिनकी उम्र करीब 85 वर्ष है ये भी करीब 30 सालों से बिना किसी लोभ लालच के मांडलगढ़ क्षेत्र की बल्दरखा ग्राम पंचायत क्षेत्र में पौधारोपण का कार्य बखूबी कर रहे है ओर बिना किसी दिखावे के,बिना सोशल मीडिया की निगरानी के,बिना फोटो खिंचवाए अपने हाथों से लगाए गए हर पौधे को जीवन प्रदान के रहे है।

अभी तक इनके द्वारा सैकड़ो नीम, पीपल,वटवृक्ष, आम,शीशम सहित अन्य प्रकार के छायादार पौधो को लगाकर उन्हें पेड़ का रूप प्रदान कर दिया है। यही नही इन पर्यावरण प्रेमी वृद्ध खाना लाल धाकड़ द्वारा अपने घर को पौधों की नर्सरी में तब्दील रखा है जहां पौधारोपण से पूर्व विभिन्न प्रकार के पौधे की नस्ल तैयार की जाती है। उधर इनके द्वारा लगाए गए पौधों की सुरक्षा की बात करें तो लोहे के ट्री गार्ड इनके द्वारा पौधों की सुरक्षा के लिए बनाई गई बाड़ के आगे बौने नजर आते है। ये अपने द्वारा लगाए पौधों की सुरक्षा के लिए कांटेदार वृक्षो की टहनियों से लगाए पौधे पर ऐसा जाल बुनते है जिसमे परिंदा पर तक नही मार सकता है। बात करे पौधों की देखरेख की तो इनके द्वारा लगाए गए पौधों की ये प्रतिदिन सार-संभाल करते है उन्हें नियमित रूप से पानी उपलब्ध कराना,पौधा खराब होने पर उसमें नया पोधा लगाना,खाद,दवा इत्यादि का प्रबंध करना शामिल है। इनके पर्यावरण प्रेम के चलते उपखण्ड स्तर गणतंत्र दिवस व 15 अगस्त के मुख्य समारोह में कई बार सम्मानित किया जा चुका है।इनकी प्रतिदिन की दिनचर्या यह है कि ये दिन उगने के साथ ही निकल पड़ते है अपने द्वारा लगाए गए पौधो की सेवा करने जिसमे पौधों की सारसंभाल के लिए काम आने वाले इनके उपकरणों में कुल्हाड़ी, बाल्टी,पानी पौधे तक पहुचाने का यंत्र,खुदाई करने का कुदाल आदि उपकरण शामिल है। परिवार में पुत्र-पोते व पुत्रवधु की मौजूदगी के बावजूद अपने कपड़े स्वयं धोना,खाना स्वयं बनाना,पालतू जानवर गाय, कुत्ते आदि की सेवा करना व प्रतिवर्ष इनके द्वारा सामूहिक प्रसादी का आयोजन कर मुख्य है।

भगत जी नाम से है पहचान

पर्यावरण प्रेमी खाना लाल धाकड़ के इन पुनीत कार्यो के लिए क्षेत्रवासी प्रेम से उन्हें भगत जी के नाम से भी सम्बोधित करते है। राज्य सरकार इन्हें अपना रोल मॉडल बनाकर पेश करे तो प्रदेश्वासियो को अवश्य पौधे लगाकर उनके लालन-पालन में अवश्य प्रेरणा मिलेगी। पर्यावरण प्रेमी खाना लाल धाकड़ अक्सर अपने एरिए में लगे वनक्षेत्र में पेड़ काटने की शिकायत लेकर सबन्धित अधिकारियों के यहां चक्कर काटते रहते है लेकिन उन्हें इस मामले में अक्सर कम राहत मिल पाती है। अपने क्षेत्र में लगे पेड़ पौधे काटने पर इन्हें बड़ा दुख होता है और वे मन ही मन इस पीड़ा से आहत रहते है। इनका कहना है की पेड़ पौधे हमे शुद्ग हवा,ओषधि,फल,पक्षियों के आवास,जलाने के लिए लकड़ी इत्यादि प्रदान करते है। ऐसे में हर आम और खास व्यक्तियों को अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाकर अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करना चाहिए। इनकी तम्मना है कि एक बार देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के मुखिया भजनलाल शर्मा से मिले ओर कैसे देश मे अधिकाधिक पेड़ पौधे लगे और हमारा पर्यावरण स्वच्छ, सुंदर बने,देश हरा-भरा हो इस पर इनसे मन्त्रणा करने की मन में इच्छा रखते है।

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